सीधी जिला न्यायालय परिसर में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब लोकायुक्त पुलिस की टीम ने जिला अभियोजन अधिकारी (DPO) राजकुमार रावत को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी अधिकारी ने टीम को देखते ही रिश्वत की रकम सड़क किनारे फेंक दी और भागने का प्रयास किया, लेकिन सतर्क (DPO caught red handed) लोकायुक्त टीम ने दौड़कर उसे काबू कर लिया।
DPO caught red handed – लोकायुक्त के अनुसार, शिकायतकर्ता पंकज तिवारी ने रीवा लोकायुक्त को शिकायत दर्ज कराई थी कि एक मामले में कार्रवाई के बदले DPO द्वारा 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। सत्यापन के बाद, सोमवार दोपहर करीब 3 बजे जब शिकायतकर्ता ने रिश्वत की दूसरी किश्त (10 हजार रुपये) दी, तभी टीम ने ट्रैप लगा दिया। आरोपी ने बचने के लिए रुपये फेंक दिए और भागने की कोशिश की, जिसे टीम ने नाकाम कर दिया।
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लोकायुक्त अधिकारियों ने मौके पर ही आरोपी के हाथों का रासायनिक परीक्षण (केमिकल टेस्ट) किया, जिसमें उनके हाथ लाल हो गए, जो घूस लेने की पुष्टि करते हैं। खुले मैदान में ही पंचनामा और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को सर्किट हाउस ले जाया गया, जहाँ देर शाम तक कार्रवाई जारी रही।
आरोपी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
फरियादी पंकज तिवारी ने बताया कि जिस मामले में यह घूस मांगी गई थी, उसी प्रकरण में साल 2025 में मझौली थाने के तत्कालीन एसआई कमलेश त्रिपाठी भी लोकायुक्त द्वारा ट्रैप किए जा चुके हैं। मामला कोर्ट में पहुंचने के बाद अब अभियोजन अधिकारी ने घूस की मांग की थी। रीवा लोकायुक्त टीआई एस.एस. मरावी ने बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपी के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।


