कोरबा: मई महीने में तपती धूप के बीच रामपुर के जंगल में ‘हरा सोना’ यानी तेंदूपत्ता संग्रहण की शुरुआत हो गई है. लंबे इंतजार के बाद शुरू हुए इस सीजन ने ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के चेहरों पर इस बार अच्छे मुनाफे की उम्मीद है. इस साल संग्रहण की विधिवत शुरुआत रामपुर केंद्र में पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिला हितग्राही शामिल हुईं.
सूरज उगने से पहले ही रामपुर निवासी कारी बाई पटेल और खेमबाई पटेल अपने परिवार के साथ जंगल पहुंची. दोपहर होते-होते जब वे तेंदूपत्ते की गड्डियां लेकर खरीदी केंद्र पहुंची तो वहां उनका स्वागत किया गया. दोनों हितग्राही संग्रहण कार्य की बोहनी करने वाली पहली संग्राहक बनीं.
छत्तीसगढ़ का हरा सोना
कारी बाई कहा कि सरकारी खरीदी समय पर शुरू होने से उन्हें बिचौलियों से राहत मिलेगी. सीधे फड़ में पत्ता बेचने से उचित पारिश्रमिक और बोनस की गारंटी मिलती है. जिससे आर्थिक लाभ होता है.
इस वर्ष 1500 की बढ़ोतरी
शासन द्वारा इस वर्ष तेंदूपत्ता दर बढ़ाकर 4,000 से 5,500 प्रति मानक बोरा करने का निर्णय लिया गया है. बढ़े हुए दर से संग्राहकों का उत्साह बढ़ा हुआ है. रामपुर क्षेत्र में तेंदूपत्ता सीजन जनजातीय परिवारों के लिए आजीविका का मुख्य आधार है. सावधानी से पत्ता तोड़ना, छंटाई करना और गड्डियाँ तैयार करना एक कठिन परंतु महत्वपूर्ण कार्य होता है. जिसमें महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से अहम है. वनोपज समिति प्रबंधकों के अनुसार इस वर्ष खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है.
गुणवत्ता का भी किया जाएगा परीक्षण
फड़ में तेंदू पत्ता के गड्डियों की गिनती और गुणवत्ता परीक्षण आधुनिक मापदंडों के आधार पर किया जा रहा है. संग्राहकों के बैंक खातों में पारिश्रमिक का भुगतान डिजिटल माध्यम से किया जाएगा. अनुकूल मौसम के कारण इस बार पत्तों की गुणवत्ता बेहतर होने की जानकारी भी दी गई है. जिससे संग्राहकों की आय बढ़ने की संभावना है. ग्रामीणों के लिए ‘हरा सोना’ केवल एक वनोपज नहीं बल्कि उनके स्वावलंबन और आर्थिक स्थिरता का आधार है.
जिला प्रशासन की अपील
प्रशासन ने सभी संग्राहकों से अपील की है कि वे शासन द्वारा निर्धारित दरों और मानकों का पालन करते हुए अपना तेंदूपत्ता केवल सहकारी समिति केंद्रों पर ही बेचें, जिससे उन्हें योजनाओं और बोनस का पूरा और सीधा लाभ मिल सके.


