रायपुर: छत्तीसगढ़ खेती किसानी से समृद्ध राज्य है. यहां पर धान के अलावा अन्य फसलों की खेती है. प्रदेश में खरीफ सीजन के लिए समितियों में खाद उपलब्ध नहीं होने पर भारतीय किसान यूनियन ने राज्य सरकार पर हमलावर रुख अख्तियार कर लिया है. उर्वरक वितरण के अनुपात में बदलाव को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने साय सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने राज्य सरकार पर किसान विरोधी नीति अपनाने का आरोप लगाया है. किसानों को सीमित मात्रा में यूरिया और डीएपी देने का फैसला फसल उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित करेगा.
किसानों के खाद अनुपात में बदलाव
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने आरोप लगाया कि सरकार ने समितियां में नगद और उर्वरक वितरण के पुराने 60:40 अनुपात को बदल दिया है. इसे 70:30 कर दिया गया है. पहले किसानों को समितियां से 40% उर्वरक मिलता था लेकिन अब यह घटकर 30% रह जाएगा. इससे किसानों को बाकी खाद निजी व्यापारियों से अधिक कीमत पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
निजी खाद कंपनियों विक्रेताओं पर अतिरिक्त सामान बेचने का दबाव बनाती है. जिसका सीधा आर्थिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है. इससे खाद विक्रेताओं और किसानों के बीच विवाद और कटुता बढ़ती है. जबकि इसका फायदा खाद कंपनियां उठाती हैं-तेजराम विद्रोही, महासचिव, भारतीय किसान यूनियन
सीमित खाद वितरण से घटेगा उप्तादन
किसान यूनियन ने सरकार के प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी देने के फैसले को किसानों के साथ धोखा बताया है. तेजराम विद्रोही का कहना है कि पिछले साल समय पर खाद नहीं मिलने से करीब 20% धान उत्पादन प्रभावित हुआ था. इस बार सीमित खाद वितरण से उत्पादन में और गंभीर गिरावट आ सकती है.
विद्रोही ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर किसानों का उत्पादन कम करना चाहती है. जिससे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कम मात्रा में धान खरीदना पड़े. उन्होंने चेतावनी दिए कि यदि किसानों को समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं कराया गया तो किसानों की परेशान बढ़ जाएगी. किसान सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर हो जाएंगे.


