रांची : नक्सल प्रभावित खूंटी जिले के अड़की थाना क्षेत्र के सुदूर और दुर्गम बुड़िकाई गांव में आखिरकार शिक्षा की नींव पड़ गई है. जहां आज तक सड़क, बिजली, पानी और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं (IIM Ranchi Initiative) पहुंच सकी, वहां अब बच्चों के हाथों में स्लेट-चॉक थमाकर पढ़ाई की शुरुआत की गई है.
IIM Ranchi Initiative – भारतीय प्रबंधन संस्थान, रांची के सहयोग से इस गांव में अस्थायी स्कूल की नींव पड़ी है. यह पहल उन 35 बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है, जो अब तक स्कूल न होने और 5-6 किलोमीटर दूर जाने की मजबूरी के कारण शिक्षा से वंचित थे.
इसे भी पढ़ें – रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने निभाया वादा! पीड़ितों को सौंपी सहायता राशि, 2 परिजनों को मिला नियुक्ति पत्र
आईआईएम, रांची के असिस्टेंट प्रोफेसर गौरव मराठे ने ईटीवी भारत से ऐसे दुरूह गांव तक शिक्षा की लौ जगाने से जुड़े सफर की जानकारी साझा की. सारा क्रेडिट संस्थान प्रबंधन और छात्रों को देते हुए कहा कि काफी पहले टीम ने बुड़िकाई गांव का दौरा किया था. वहां की स्थिति देखने के बाद एक अस्थाई स्कूल स्थापित करने पर सहमति बनी.
संस्थान में ‘Joy of Giving’ कार्यक्रम के तहत एकत्रित फंड से करीब 15 हजार रुपये की लागत से एस्बेस्टस छत वाला शेड बनवाया गया. गांव के लोगों ने जंगल से लकड़ी लाकर और श्रमदान कर निर्माण कार्य पूरा किया. अब समस्या थी कि बच्चों को पढ़ाएगा कौन?. तब गांव के सबसे पढ़े-लिखे ‘बोगन हांस’ के नाम पर सहमति बनी, जो अब इस स्कूल में रोजाना तीन घंटे बच्चों को पढ़ाएंगे. इसके लिए उन्हें IIM रांची की ओर से 5 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा. सुबह 8 बजे से 10 बजे तक नियमित कक्षाएं संचालित होंगी.


