पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल से अंतरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में बुधवार को रुपया 67 पैसे की गिरावट के साथ 92.16 (अस्थायी) प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ. मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल है, जिससे (panic in currency market) सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग बढ़ी है. इसके चलते डॉलर सूचकांक 98 के स्तर को पार कर गया, जिससे भारतीय मुद्रा पर दबाव और बढ़ गया. इसके अलावा घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी ने भी रुपये की गिरावट में भूमिका निभाई.
फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में रुपया 92.05 पर खुला और कारोबार के दौरान 92.35 के अब तक के सबसे निचले स्तर तक चला गया. अंत में यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 67 पैसे की भारी गिरावट के साथ 92.16 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ. इससे पूर्व सोमवार को रुपया 41 पैसे टूटकर 91.49 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. मंगलवार को ‘होली’ के उपलक्ष्य में विदेशी मुद्रा बाजार बंद रहा था.
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष में आई तीव्रता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों के उत्साह को कम कर दिया है. तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए मुद्रास्फीति की चिंता और राजकोषीय दबाव को बढ़ाती हैं. इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.82 पर कारोबार कर रहा था.
panic in currency market – रुपए में इतनी ज्यादा गिरावट का सबसे बड़ा कारण दुनिया भर में तेल की कीमतों में अचानक आई तेज़ी है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने सप्लाई में रुकावट का डर बढ़ा दिया है, खासकर उन खास एनर्जी बनाने वाले इलाकों से. सिर्फ दो दिनों में लगभग 12-13 फीसदी बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड $82 प्रति बैरल से ऊपर चला गया — यह 2020 के बाद से इसकी सबसे बड़ी तेजी है. ट्रेडर्स को डर है कि लंबे समय तक तनाव रहने से खाड़ी के जरूरी रास्तों से तेल शिपमेंट पर असर पड़ सकता है.

