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    Home » कैंसर से डरें नहीं, इससे लड़ना सीखें

    कैंसर से डरें नहीं, इससे लड़ना सीखें

    February 4, 2021 बड़ी खबर 4 Mins Read
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    World Cancer Day 2021: गली से लिपटी हुई तितली को गिराकर देखो…आथियों तुमने दरख्तों को गिराया होगा’.. कैफ ‘भोपाली’ की ये पंक्तियां सरलभान में बह रही जिंदगी के बीच अचानक आई कैंसर रूपी बीमारी के पहाड़ को चुनौती देकर डटकर खड़े कासिम और उनकी पत्नी शमीम पर बखूबी उतरती है। कासिम के वैवाहिक जीवन की शुरुआत को सात-आठ माह ही बीते थे कि बहुत ही बुरी खबर आई। पता चला कि उनको कैसर है । जिंदगी सिविल पड़ गई खुट से ज्वादी पतनी शमीम की चिंता थी। लेकिन, शमीम ने पति को नित्य नहीं होने दिया, भक्ति कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने में कवच बनकर उनके साथ खडी रही। 14 साल में बार बार कैंसर ने हमला बोला, लेकिन हर बार कासिम विजेता की तरह उसे मात देकर निकले। वह कहते हैं कि पत्नी से मिली ताकत की बदौलत वह ऐसा कर पाए। आज यह दंपती पांच हजार से ज्यादा साइवर को अपने साथ जोड़ चुका है। सभी मिलकर देशभर में कैंसर पीड़िता को जागरूक कररहे हैं ।

    मूल रूप से पुरानी दिल्ली के रहने वाले कासिम 10 साल के थे, तभी पिता का इंतकाल हो गया । इसके एक माह बाद मां का भी निधन हो गया। ऐसे में पांच भाई-बहन एक-दूसरे का सहारा बने। कासिम ने फर्नीचर के दुकान पर नौकरी करते हुए जाकिर हुसैन कालेज से स्नातक किया। धीरे-धीरे कारोबार में हाथ आजमाना शुरू किया। इलेक्ट्रिक मोटर की फैक्ट्री शुरू कर दी। शादी के कुछ माह बाद ही कासिम को कैंसर होने का पता चला। जामिया मिल्लिया से पढ़ी पत्नी शमीम मूल रूप से असम की रहने वाली हैं। वह बताती हैं कि पति को कैंसर का पता चला तो जैसे पहाड़ टूट पड़ा ।

    इसे भी पढ़े:किसान आंदोलन को लेकर ट्वीट करने वाली ग्रेटा थनबर्ग के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

    उन दिनों वह गर्भवती थी और सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर मेंस की तैयारी में जुटी भी। मायके वाले चाहते थे कि पति को छोड़कर नया जीवन शुरू करूं, लेकिन मुझे भगवान पर पूरा भरोसा था। मैंने सबकुछ छोड़कर पति की सेवा को जरूर समझा।बसयही प्रार्थनाथी कि पति सलामत रहे। करवा चौथ का व्रत भी रखा। कासिम ठीक है।

    शुक्रगुजार हूँ ऊपर वाले का कि शमीम का साथ मिला.

    मेरी जिंदगी तो खत्म हो चुकी थी, इन्होंने ही सभाला, जिजीविषा जगाई

    और मुझे हर वार खडा किया। और आज खुद भी अपने पढ़ाई के शौक

    को फिजिकल साइकोलाजी, पीएचडी कर पूरा किया।

    – कासिम, केसर स्वावर

    World Cancer Day 2021: हमारी जिंदगी में बेटी जवेरिया भी आ चुकी थी और अभी सब कुछ संभाला ही था कि 2009 में कैंसर दोबारा उभर गया, फिर अस्पताल और कीमोथेरेपी का सिलसिला शुरू हो गया। कासिम ठीक हुए, लेकिन 2014 में कैसर तीसरी बार उभर गया। इससे जीत मिली तो सितंबर, 2019 में दिमाग में लिम्फोमा (एक तरह का ब्लड कैंसर) ने असर दिखाया। इससे कासिम को आंख से 70 फीसद दिखना कम हो गया है । चलने-फिरने में दिक्कत होती है। फिलहाल अब वह स्वस्थ हैं और इस कोरोना काल में भी अपने कारोबार को देख रहे हैं ।

    आज 5000 सर्वाइवर का परिवार

    World Cancer Day 2021: कैसर ने इस दोस्ती को जीवन का एक अलग मकसद भी दिया। शमीम क्ताती हैं। कि प्रशासनिक सेवा में जाकर जो सेवा करती, उससे कहीं अधिक आज हजारों कैसर सर्वाइवर के साथ मिलकर लोगों को जागरूक कर पूरा कर रही हूं वह बताती हैं कि जब पति को लेकर अस्पताल जाती थी तो वहा वहता सार ऐसे मरीज व उनके स्वजन मिलोवेजिन्हें सहायता की जरूरत होती थी। ऐसे ही लोगों के लिए 2014 में कुछ चिकित्सको और कैसर से विजयी लोगों के साथ मिलकर लिमकोमा सपोर्ट गुप आफ इंडिया बनाया हुआ है। आज 5000 लोग इसमें जुडे हुए हैं। इस समूह के माध्यम से देशभर में खासकर पूर्वोत्तर तथा इुग्यी बस्टियों मेलोगो को कैसर के प्रतिजागरूक किया जा रहा है । इसी तरह कैंसर पीडित को चिकित्सकीय परामर्श, चिकित्सकीय सहायता के साथ हर प्रकार का सहयोग नि शुल्क किया जा रहा है।

    इसे भी पढ़े: How Your Genes Contribute to Cancer

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