नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से तीखा सवाल करते हुए पूछा कि वह जंतर-मंतर क्षेत्र को विरोध प्रदर्शन के स्थान के रूप में बंद करने पर विचार क्यों नहीं कर रही है?
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि देश की राजधानी के मध्य में होने वाले ऐसे विरोध प्रदर्शनों के कारण पूरे शहर को अकारण परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की कि आखिर दिल्ली के हृदय स्थल में आयोजित होने वाले धरना-प्रदर्शनों के कारण संपूर्ण नगर को ‘बंधक’ क्यों बनाया जाए?
⚖️ ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दी प्रतिक्रिया
पीटीआई (PTI) समाचार एजेंसी के अनुसार, न्यायमूर्ति अमित महाजन ने सुनवाई के दौरान कहा, “मेरे मतानुसार, ऐसी गतिविधियां शहर के भीतर केंद्रित नहीं होनी चाहिए, हालांकि यह पूरी तरह सरकार का नीतिगत निर्णय है। अकारण पूरे शहर को बंधक क्यों बनाया जाए?”
जस्टिस महाजन ने यह मौखिक टिप्पणी ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। इस याचिका में दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाले उनके आवेदन पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
🏛️ “जुलाई से लंबित है आवेदन”: याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने रखी अपनी बात
याचिकाकर्ता संस्था की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने पीठ के समक्ष पक्ष रखते हुए बताया कि दिल्ली पुलिस ने उनके आवेदन को न तो स्वीकृत किया है और न ही निरस्त किया है।
घोष ने कहा, “हमारी ओर से केवल अधिकतम 75 लोगों के एकत्र होने का आश्वासन दिया गया है। दिल्ली पुलिस जुलाई माह से हमारे आवेदन पर कोई निर्णय लिए बिना बैठी है।” इस पर अदालत ने अपर सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा से पूछा कि सरकार इस स्थल को प्रदर्शनों हेतु पूरी तरह प्रतिबंधित क्यों नहीं कर सकती?
🚫 “क्या दिल्ली में कोई शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं हो सकता?”— कोर्ट और वकीलों के बीच तीखी बहस
जस्टिस महाजन ने एएसजी से पूछा, “मेरे विचार से, आप इस स्थान को बंद क्यों नहीं कर देते? यह दिल्ली के मुख्य क्षेत्र के अंदर नहीं होना चाहिए।”
इस पर एएसजी चेतन शर्मा ने प्रत्युत्तर दिया कि उच्चतम न्यायालय का आदेश इसी विषय पर केंद्रित है और शीर्ष अदालत इस पहलू पर विचार कर रही है कि क्या जंतर-मंतर को स्थायी प्रदर्शन स्थल बनाया जा सकता है। तत्पश्चात एडवोकेट घोष ने प्रश्न किया कि क्या यह केंद्र सरकार का आधिकारिक रुख है कि दिल्ली में कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हो सकता? इस पर जस्टिस महाजन ने स्पष्ट किया कि वे लोकतांत्रिक या गैर-लोकतांत्रिक अधिकारों पर टिप्पणी नहीं कर रहे, बल्कि मुख्य प्रश्न यह है कि आम जनता व एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को रोककर शहर को बंधक क्यों बनाया जाए।
🛡️ स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा और धारा 144 का हवाला, दिल्ली पुलिस को 8 अगस्त तक निर्णय लेने का आदेश
सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (तत्कालीन CrPC) की धारा 144 लागू है और 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) निकट है।
उन्होंने तर्क दिया कि सुरक्षा बल तैनात हैं और 75 लोगों की भीड़ कब 75,000 में परिवर्तित हो जाए, इसका पूर्वानुमान लगाना कठिन होता है। अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के उपरांत दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी के आवेदन पर 8 अगस्त तक विधिवत निर्णय ले और याचिका का निस्तारण कर दिया।


