Close Menu
करंट न्यूज़करंट न्यूज़
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी बाजार पर संकट, ‘सुपर अल नीनो’ से क्यों सहमे हैं निवेशक?
    • WhatsApp New Feature: अब नंबर देने की जरूरत नहीं! वॉट्सएप पर अपना यूजरनेम बनाने की सुविधा शुरू
    • Draupadi Panchali: पांचाली क्यों कहलाईं द्रौपदी? पांडवों से विवाह के पीछे का पौराणिक कारण
    • मनेंद्रगढ़: गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देने वाली महिला गिरफ्तार, पुलिस ने बीएनएसएस की धाराओं में दर्ज किया केस
    • धमतरी के सत्यांशु दीप का स्पेशल ओलंपिक फुटबॉल टीम में चयन, स्वीडन में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व
    • एमसीबी हत्याकांड: तिहरे हत्याकांड के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग, मनेन्द्रगढ़ पहुंचे करणी सेना प्रमुख
    • इंदौर मेट्रो के लिए जर्मनी-थाईलैंड से आईं खास मशीनें, अगस्त से शुरू होगा अंडरग्राउंड खुदाई का काम
    • IAS संतोष वर्मा के खिलाफ NSA की मांग वाली याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, जानें क्या है पूरा मामला
    करंट न्यूज़करंट न्यूज़
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Wednesday, July 1
    • होम
    • राज्य
      • दिल्ली
      • उत्तर प्रदेश
      • उत्तराखण्ड
      • मध्य प्रदेश
      • छत्तीसगढ़
      • हिमांचल प्रदेश
      • पंजाब
      • झारखण्ड
      • बिहार
      • राजस्थान
      • हरियाणा
      • गुजरात
      • महाराष्ट्र
      • जम्मू कश्मीर
    • देश
    • विदेश
    • मनोरंजन
    • खेल
    • टेक्नोलॉजी
    • धार्मिक
    • लाइफ स्टाइल
    करंट न्यूज़करंट न्यूज़
    Ad
    Home » घोषणा पत्र को लेकर Supreme Court ने क्या दिया था फैसला?

    घोषणा पत्र को लेकर Supreme Court ने क्या दिया था फैसला?

    April 5, 2024 देश 3 Mins Read
    Share
    Facebook Twitter Email WhatsApp Copy Link

    किसी भी चुनाव में वोटर ही सर्वेसर्वा होता है और वही अंतिम निर्णायक भी होता है। इसी वजह से चुनाव से पहले सभी पार्टियां अपना घोषणा पत्र लेकर आती हैं, जिसमें यह बताया जाता है कि उनका एजेंडा क्या है। ये पार्टियां अपने घोषणापत्र में यह बताती हैं कि चुनकर आने पर वे जनता के हित में क्या-क्या काम करेंगी, कैसे सरकार चलाएंगी और जनता को क्या फायदा होगा।

    इसे भी पढ़ें – कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता गौरव वल्लभ BJP में हुए शामिल

    घोषणा पत्र पर निर्भर करता है बहुत कुछ 

    आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भी जहां कांग्रेस ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। वहीं भाजपा भी अगले कुछ दिनों में घोषणा पत्र जनता के सामने रखेगी। इसके अलावा अन्य दल भी अपनी घोषणाओं के साथ जनता के सामने जाएंगे। बता दें कि चुनावी घोषणा पत्र तैयार करने के लिए राजनीतिक दल कठिन मेहनत करते हैं, क्योंकि इसी घोषणापत्र को उन्हें जनता के सामने प्रस्तुत करना होता है।

    घोषणा पत्र के लिए सभी दल एक विशेष टीम का गठन करते हैं, जो पार्टियों की नीति और जनता की मांग के अनुरूप मुद्दों का चयन करती है। फिर पार्टी के पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों के साथ इस पर चर्चा की जाती है। इसके बाद आर्थिक, सामाजिक एवं अन्य मुद्दों को लेकर नीतियां तैयार की जाती हैं और इसे घोषणा पत्र के रूप में पेश किया जाता है। लेकिन केवल लोगों को लुभाने के उद्देश्य से पार्टियां घोषणा पत्र में कोई भी गलत या भ्रामक वादा नहीं कर सकती हैं।

    सुप्रीम कोर्ट भी दे चुका है निर्देश

    इसे लेकर चुनाव आयोग की कुछ गाइडलाइन हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है। सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court ) भी इसे लेकर निर्देश दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जुलाई 2013 को एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु सरकार और अन्य के मामले में फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग को सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के परामर्श से चुनावी घोषणापत्र के संबंध में दिशा-निर्देश तैयार करने का निर्देश दिया था।

    इसे भी पढ़ें – सोनिया गांधी और अश्विनी वैष्णव सहित 14 सांसदों ने राज्यसभा सदस्य के रूप ली शपथ

    Supreme Court ने अपने फैसले में कई बातें कही थीं, जिनमें से कुछ ये हैं। पहला, चुनाव आयोग, चुनाव में लड़ने वाले दलों और उम्मीदवारों के बीच समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए और यह देखने के लिए कि चुनाव प्रक्रिया की शुचिता खराब न हो, घोषणापत्र को लेकर निर्देश जारी करे, जैसा कि आयोग अतीत में आदर्श आचार संहिता के तहत करता आया है।

    आयोग के पास संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत यह शक्तियां हैं कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए ऐसे आदेश दे सकता है। दूसरा, हम इस तथ्य से अवगत हैं कि आम तौर पर राजनीतिक दल चुनाव की तारीख के एलान से पहले अपना चुनाव घोषणा पत्र जारी करते हैं, ऐसी परिस्थिति में चुनाव आयोग के पास किसी भी कार्य को रेगुलेट करने का अधिकार नहीं होता है। फिर भी, इस संबंध में एक अपवाद बनाया जा सकता है, क्योंकि चुनावी घोषणापत्र का उद्देश्य सीधे चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा होता है।

    Follow on Google News Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on YouTube Follow on WhatsApp
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email Telegram WhatsApp Copy Link

    Keep Reading

    WB UCC Update: पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी; ड्राफ्ट कमेटी का हुआ ऐलान

    Train Accident in Assam: रेलवे ट्रैक पर काम कर रहे मजदूरों के साथ दर्दनाक हादसा; 2 की मौत, 2 घायल

    Mann Ki Baat: ‘हरगिला चिड़िया’ बनी असम के गांवों की पहचान; PM मोदी ने की ‘हरगिला सेना’ की जमकर तारीफ

    Sharmistha Mukherjee on PM Modi: ‘आप मोदी से नफरत या प्यार करें, लेकिन ब्रांड मोदी को नजरअंदाज नहीं कर सकते’

    बंगाल में ‘गुंडा’ एक्ट की तैयारी; सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की होगी संपत्ति जब्त

    Operation Sindoor Heroes: नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर दर्ज हुआ ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों का नाम

    • Facebook
    • YouTube
    • WhatsApp
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube

    राज्य -  दिल्ली    उत्तर प्रदेश    उत्तराखण्ड    मध्य प्रदेश    छत्तीसगढ़    हिमांचल प्रदेश    पंजाब    झारखण्ड    बिहार   राजस्थान    हरियाणा

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.