जबलपुर में आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज के खिलाफ की गई कथित विवादित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने अजाक्स के प्रदेश अध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।
📝 क्या था याचिका में मुख्य तर्क?
जबलपुर के एडवोकेट अभिषेक दुबे द्वारा दायर इस जनहित याचिका में कहा गया था कि अजाक्स के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद आईएएस संतोष वर्मा ने ब्राह्मण समाज पर अपमानजनक टिप्पणी की, जिससे सामाजिक विद्वेष फैला है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते उन्हें सार्वजनिक बयानों में गरिमा का ध्यान रखना चाहिए था। याचिका में ऑल इंडिया सर्विसेज रूल्स, 1968 के नियम 3 के उल्लंघन का हवाला देते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और NSA के तहत कार्रवाई करने की मांग की गई थी।
⚖️ हाईकोर्ट ने इस तर्क के साथ याचिका ठुकराई
हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली बैंच ने स्पष्ट किया कि NSA के तहत कार्रवाई करना पूरी तरह से प्रशासनिक अधिकारियों का विशेषाधिकार है। न्यायालय सरकार को किसी के खिलाफ NSA लगाने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा:
“इस मामले में पहले से ही एफआईआर दर्ज है, इसलिए अलग से किसी अन्य आदेश को पारित करने की आवश्यकता नहीं है। कानून अपना काम करेगा और संबंधित मामले में प्रक्रिया जारी रहेगी।”
कोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ याचिका को खारिज कर दिया है। अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और पुलिस जांच पर ही सबकी निगाहें टिकी हैं।


