उज्जैन: धर्म नगरी उज्जैन में अक्षय तृतीया पर एक विशेष आध्यात्मिक आयोजन के दौरान हर्षा रिछारिया ने सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास धारण कर लिया. दीक्षा के बाद उनका नया (Harsha Richhariya became swami Harshanand Giri) नाम हर्षानंद गिरी रखा गया. उन्होंने सुमिनानंद महाराज से विधिवत संन्यास दीक्षा लेकर आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की.

संन्यास दीक्षा की पूरी हुई विधि

मोनी तीर्थ आश्रम में रविवार को आयोजित इस दीक्षा समारोह में हर्षा रिछारिया ने सुमिनानंद महाराज से संन्यास दीक्षा ली. हर्षा रिछारिया ने संन्यास परंपरा के सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए गए. परंपरा के अनुसार हर्षा रिछारिया ने शिखा त्याग, दंड त्याग, तर्पण और स्वयं का पिंडदान जैसे कठिन संस्कार संपन्न किए. संन्यास ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने अपने पुराने जीवन का त्याग कर पूर्ण रूप से आध्यात्मिक मार्ग अपनाने का संकल्प लिया.

हर्षा रिछारिया बनीं स्वामी हर्षानंद गिरी

महामंडलेश्वर सुमिनानंद महाराज ने बताया कि “संन्यास की यह प्रक्रिया व्यक्ति के पुराने जीवन से पूर्ण विराम और नए आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत का प्रतीक होती है. संन्यास लेने वाले को अपने हाथों से खुदा का पिंडदान और श्राद्ध कर्म करना पड़ता है, जिससे वह सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर नए जीवन में (Harsha Richhariya became swami Harshanand Giri) प्रवेश करता है.” हर्षा रिछारिया ने भी संन्यास जीवन में प्रवेश किया है और अब उन्हें स्वामी हर्षानंद गिरी के नाम से जाना जाएगा.

 

 

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