पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने रांची स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य की संस्कृति और अस्मिता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने बताया कि आगामी 4 जुलाई को रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में झारखंड की 9 मान्यता प्राप्त जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक भव्य राज्यस्तरीय कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। राज्य गठन के इतने वर्षों बाद यह पहला अवसर है जब संथाली, मुंडारी, हो, कुड़ूख, खड़िया, नागपुरी, पंचपरगानिया और खोरठा जैसी प्रमुख भाषाएं एक साझा मंच पर होंगी।
📉 मातृभाषाओं से दूर होती नई पीढ़ी: चिंता का विषय
बंधु तिर्की ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य निर्माण के 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी इन भाषाओं के शिक्षा और संरक्षण के लिए अपेक्षित कार्य नहीं हुआ है। इसका परिणाम यह है कि आज की नई पीढ़ी अपनी जड़ों और मातृभाषा से दूर होती जा रही है। उन्होंने बताया कि इस कॉन्क्लेव में लगभग 2,500 छात्र-छात्राएं, भाषाविद, प्रोफेसर और शोधार्थी भाग लेंगे, जो इन भाषाओं को नई दिशा देने पर गहन चर्चा करेंगे।
📢 राजनीतिक दलों को चेतावनी, भाषा पर सियासत नहीं
पूर्व शिक्षा मंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि राज्य में जो भी राजनीतिक दल इन जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को नजरअंदाज करेगा, उसे जनता कभी माफ नहीं करेगी और उनका राजनीतिक अस्तित्व मिट जाएगा। उन्होंने कहा कि नकारात्मक खबरों के बीच यह शैक्षणिक आयोजन राज्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
🛠️ पिछली सरकारों की अनदेखी का आरोप
बंधु तिर्की ने खुलकर कहा कि झारखंड में अब तक बनी किसी भी सरकार ने इन 9 भाषाओं के विकास के लिए वह गंभीरता नहीं दिखाई जो अनिवार्य थी। उन्होंने अपने स्तर से इस पहल को एक ऐतिहासिक शुरुआत बताया है, जहां इन भाषाओं के पुरोधा और युवा पीढ़ी एक साथ बैठकर भविष्य की कार्ययोजना तैयार करेंगे।


