भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ चल रहे बहुचर्चित यौन शोषण मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने बृजभूषण सिंह को दोषी ठहराने या बरी करने का अंतिम आदेश 3 अगस्त, 2026 को सुनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही दोनों पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें जमा करने को कहा गया है।
🔍 क्या है पूरा मामला और आरोप?
यह कानूनी लड़ाई 6 महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुई थी। दिल्ली पुलिस ने 15 जून 2023 को बृजभूषण सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 354A, 354D और 506(1) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। 10 मई 2024 को ट्रायल कोर्ट ने प्रथम दृष्टया सबूतों को पर्याप्त मानते हुए बृजभूषण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों को परेशान करने, उनकी गरिमा को ठेस पहुँचाने और आपराधिक धमकी देने जैसे अपराधों के लिए आरोप तय किए थे।
🛡️ सह-आरोपी और शिकायत का आधार
इस मामले में WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी सह-आरोपी बनाया गया है, जिन पर पीड़ितों को धमकाने का आरोप है। उल्लेखनीय है कि शुरुआत में इस मामले में एक नाबालिग पहलवान ने भी बृजभूषण सिंह पर आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में उसने अपनी शिकायत वापस ले ली। इस कारण दिल्ली पुलिस ने POCSO एक्ट के तहत उस विशिष्ट मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसके बाद उस हिस्से की कानूनी कार्यवाही बंद कर दी गई थी।
🗓️ कोर्ट का रुख और अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) और बचाव पक्ष के वकीलों (रेबेका जॉन, राजीव मोहन) की विस्तृत दलीलें दर्ज कीं। अब सभी की निगाहें 3 अगस्त पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि क्या पेश किए गए साक्ष्य बृजभूषण शरण सिंह को दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। यह फैसला भारतीय खेल जगत और महिला सुरक्षा के मामले में एक बड़ा कानूनी पड़ाव साबित होगा।


