Close Menu
करंट न्यूज़करंट न्यूज़
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • ऑन-स्क्रीन मार्किंग में धांधली का आरोप; NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की PIL, स्वतंत्र जांच की मांग
    • कुशीनगर को बड़ी सौगात; फाजिलनगर अब कहलाएगा ‘पावागढ़’, सीएम योगी ने किया ऐलान
    • कर्नाटक के नए मुखिया डी.के. शिवकुमार; शिक्षिका ने याद किए स्कूली दिन, कहा- ‘नेतृत्व तो खून में था’
    • दाऊद इब्राहिम के करीबी सलिम डोला पर ईडी का शिकंजा; मुंबई से राजकोट तक 20 जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
    • बंगले पर घमासान! राबड़ी देवी को बंगला खाली करने के आदेश पर भड़की RJD, सम्राट चौधरी का पलटवार
    • फर्जी साधु का पर्दाफाश; हाई-पैकेज वाली युवतियों को फंसाकर करता था दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग
    • पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें बढ़ाएंगी महंगाई; दूध-सब्जी से लेकर सीमेंट तक होगा महंगा, CRISIL की रिपोर्ट
    • कृषि में क्रांति! धमतरी बना देश का पहला जिला, PACS के जरिए किसानों को मिलेगी अत्याधुनिक ‘ड्रोन स्प्रेयर’ सुविधा
    करंट न्यूज़करंट न्यूज़
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Tuesday, June 2
    • होम
    • राज्य
      • दिल्ली
      • उत्तर प्रदेश
      • उत्तराखण्ड
      • मध्य प्रदेश
      • छत्तीसगढ़
      • हिमांचल प्रदेश
      • पंजाब
      • झारखण्ड
      • बिहार
      • राजस्थान
      • हरियाणा
      • गुजरात
      • महाराष्ट्र
      • जम्मू कश्मीर
    • देश
    • विदेश
    • मनोरंजन
    • खेल
    • टेक्नोलॉजी
    • धार्मिक
    • लाइफ स्टाइल
    करंट न्यूज़करंट न्यूज़
    Home » Supreme Court Verdict: विवाहित बेटियां भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार; सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुरानी व्यवस्था को किया रद्द

    Supreme Court Verdict: विवाहित बेटियां भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार; सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुरानी व्यवस्था को किया रद्द

    June 2, 2026 देश 3 Mins Read
    Share
    Facebook Twitter Email WhatsApp Copy Link

    सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि विवाहित बेटियां भी अनुकंपा नियुक्ति और अनुकंपा के आधार पर लाइसेंस पाने की पूरी तरह पात्र हैं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि केवल ‘वैवाहिक स्थिति’ के आधार पर किसी पुत्री को कल्याणकारी योजनाओं से वंचित करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन भी है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें विवाहित पुत्री को परिवार की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया था।

    📜 क्या था मामला?

    याचिकाकर्ता एक विवाहित पुत्री थी, जो अपनी मां के साथ रहकर उचित मूल्य की दुकान चलाती थी और अपनी शारीरिक रूप से अक्षम बहन की देखभाल करती थी। मां के निधन के बाद उसने दुकान के लाइसेंस के लिए आवेदन किया, लेकिन उसे विवाहित होने के कारण ‘परिवार’ की परिभाषा से बाहर बताकर आवेदन खारिज कर दिया गया। उसने 2019 के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी, जो विवाहित पुत्रियों को इस अधिकार से वंचित करता था।

    💡 अदालती तर्क: विवाह पात्रता में बाधा नहीं

    सुप्रीम कोर्ट ने रंजना मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्णय को आधार मानते हुए कहा कि वैवाहिक स्थिति किसी पात्र पुत्री को सरकारी लाभ से वंचित करने का वैध आधार नहीं हो सकती। कोर्ट ने विमल श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2015) मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें ‘अविवाहित’ शब्द के प्रयोग को ही भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक माना गया था। पीठ ने स्पष्ट किया कि विवाहित पुत्री यदि सभी शर्तों को पूरा करती है और अपने माता-पिता पर आश्रित है, तो उसे नियुक्ति या लाइसेंस से वंचित नहीं किया जा सकता।

    ✅ चार सप्ताह के भीतर लाइसेंस जारी करने का आदेश

    फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता को चार सप्ताह के भीतर उचित मूल्य की दुकान का लाइसेंस जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अपीलकर्ता का विवाह के बाद भी माता-पिता के साथ रहना और दुकान में सहयोग करना उसे पूरी तरह से आश्रित और योग्य सिद्ध करता है। यह निर्णय देशभर की लाखों विवाहित बेटियों के लिए एक बड़ी राहत और न्याय की जीत है।

    संपादकीय टिप्पणी: सर्वोच्च अदालत का यह फैसला लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में एक साहसिक कदम है। क्या आपको लगता है कि इस तरह के न्यायिक हस्तक्षेप के बाद अब सरकारी नियमों में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है? अपने विचार नीचे साझा करें।

    Follow on Google News Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on YouTube Follow on WhatsApp
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email Telegram WhatsApp Copy Link

    Keep Reading

    ऑन-स्क्रीन मार्किंग में धांधली का आरोप; NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की PIL, स्वतंत्र जांच की मांग

    कर्नाटक के नए मुखिया डी.के. शिवकुमार; शिक्षिका ने याद किए स्कूली दिन, कहा- ‘नेतृत्व तो खून में था’

    दाऊद इब्राहिम के करीबी सलिम डोला पर ईडी का शिकंजा; मुंबई से राजकोट तक 20 जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी

    CBSE Class 12th Results: ऑन-स्क्रीन मार्किंग में धांधली का आरोप; NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की PIL, स्वतंत्र जांच की मांग

    DK Shivakumar CM News: कर्नाटक के नए मुखिया डी.के. शिवकुमार; शिक्षिका ने याद किए स्कूली दिन, कहा- ‘नेतृत्व तो खून में था’

    ED Raids on Drugs Network: दाऊद इब्राहिम के करीबी सलिम डोला पर ईडी का शिकंजा; मुंबई से राजकोट तक 20 जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी

    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube

    राज्य -  दिल्ली    उत्तर प्रदेश    उत्तराखण्ड    मध्य प्रदेश    छत्तीसगढ़    हिमांचल प्रदेश    पंजाब    झारखण्ड    बिहार   राजस्थान    हरियाणा

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.