4 साल से लगातार जारी जंग की विभीषिका झेल रहे रूसी कब्जे वाले यूक्रेनी शहर ओलेशकी (Oleshky) में भोजन, पानी और जीवनरक्षक दवाइयों की आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। स्थानीय निवासी 5-5 घंटे (starvation conditions in oleshki) तक राहत सामग्री की कतारों में खड़े रहते हैं, लेकिन जब कुछ नहीं मिलता तो वे पेट भरने के लिए घास खाने को विवश हो जाते हैं।
starvation conditions in oleshki- यूक्रेनी मीडिया आउटलेट ‘यूक्रेन प्रवदा’ की एक ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध से पहले इस शहर की कुल आबादी लगभग 40 हजार थी, जो अब सिमटकर महज 1,500 रह गई है। यहां अब वही बेबस लोग फंसे हैं, जो खेरसॉन होकर सुरक्षित स्थानों पर नहीं निकल सके। एक स्थानीय महिला ने बताया कि भोजन न मिलने पर वे घास का सूप बनाकर पीते हैं और कई बार जिंदा रहने के लिए कबूतरों व अन्य पक्षियों को मारकर खाना पड़ता है।
95 फीसदी लोग कर चुके हैं पलायन
यह शहर खेरसॉन से महज 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जब खेरसॉन पर हमला हुआ तो इस शहर का मुख्य संपर्क टूट गया और रूसी सेना ने इस पर नियंत्रण कर लिया। शहर में बीते 2 वर्षों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है। एक स्थानीय व्यापारी ने निजी प्रयासों से कुछ राशन मंगवाया था, वहीं कुछ नागरिक मशरूम और गोभी उगाने का प्रयास करते हैं।लगातार जारी शेलिंग और मिसाइल हमलों के कारण खेती करना लगभग नामुमकिन हो चुका है। यही वजह है कि शहर की लगभग 95 प्रतिशत आबादी पलायन कर चुकी है।
150 रुपये का एक अंडा, 1000 रुपये किलो आलू-प्याज
भोजन की भारी किल्लत के कारण एक अंडे की कीमत 150 रुपये तक पहुंच चुकी है। आलू और प्याज की कीमतें 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। तोरी 600 रुपये प्रति किलो, टमाटर 200 रुपये प्रति किलो और शिमला मिर्च 1,000 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही है। सीमित आमदनी और बचत के बीच आम नागरिकों के लिए इन बुनियादी चीजों को खरीदना भी असंभव हो गया है।
