उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल प्रशासन पर तल्ख टिप्प्णी करते हुए उन्हें अपनी ड्यूटी का एहसास कराया है. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने (Sambhal Namaz Controversy) संभल की एक मस्जिद में मुस्लिम नमाजियों की संख्या सीमित करने के स्थानीय प्रशासन के फैसले पर सख्त रुख अपनाया.
इसे भी पढ़ें – बिजनौर में RSS नेता के घर बदमाशों का तांडव! परिवार को बंधक बनाकर लूटपाट और तोड़फोड़; पुलिस ने 2 को दबोचा
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि यह राज्य का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि हर परिस्थिति में कानून का राज कायम रहे. कोर्ट ने संभल के एसपी और डीएम को फटकार लगाते हुए कहा कि अपने आदेश में कहा कि मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं कर सकते हैं. कोर्ट ने संभल प्रशासन के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि नमाजियों की संख्या कैसे तय की जा सकती है.
इसे भी पढ़ें – अखिलेश यादव का बड़ा धमाका: “शंकराचार्य का आशीर्वाद मिल गया, अब नकली संतों का होगा अंत!”
Sambhal Namaz Controversy – कोर्ट ने संभल एसपी और डीएम को सख्त लहजे में कहा कि अगर कानून-व्यवस्था सुनिश्चित नहीं कर सकते तो इस्तीफा दे दें या फिर तबादला करवा लें. हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वो यह सुनिश्चित करे कि हर हाल में कानून का राज कायम रहे. कोर्ट ने कहा कि अगर वे अधिकारी उन्हें लगता है कि वे कानून का राज लागू करने में सक्षम नहीं हैं, तो इस्तीफा देकर चले जाएं. या फिर कहीं और जाकर ड्यूटी करें.
