उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में आज मंगलवार को अहम कैबिनेट बैठक में 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई. योगी कैबिनेट ने उस प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी दे दी है जिसके तहत (game of registry is over) अब किसी भी संपत्ति को बेचने से पहले विक्रेता का नाम खतौनी या अन्य दस्तावेज में मिलान किया जाएगा. यदि दोनों जगह नाम आपस में नहीं मिलते हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी. इस नई व्यवस्था के जरिए खरीद-फरोख्त से जुड़े फर्जीवाड़ा पर लगाम लगाई जा सकेगी.
इसे भी पढ़ें – भजन कुटी में नाबालिग से कुकर्म के आरोपी बाबा की पिटाई, वीडियो वायरल होने पर मची सनसनी
सीएम योगी की अगुवाई वाली बैठक में आज 31 प्रस्तावों पर चर्चा की गई जिनमें से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई. तो वहीं 3 प्रस्तावों को होल्ड पर रख दिया गया. बैठक में प्रॉपर्टी से जुड़ी रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को पारदर्शी बनाने को लेकर अहम फैसला लिया गया. नए बदलाव के तहत अब किसी भी संपत्ति को बेचने से पहले विक्रेता का नाम का खतौनी में मिलान किया जाएगा. यदि खतौनी में नाम अलग मिलता है तो रजिस्ट्रेशन विभाग इसकी जांच करेगा.
इसे भी पढ़ें – लखनऊ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की धर्म यात्रा को मंजूरी! प्रशासन ने थमाई 16 ‘सख्त’ शर्तों की लिस्ट
game of registry is over – नए फैसले के तहत खतौनी जांच के बाद ही रजिस्ट्री कराई जा सकेगी. जबकि इससे पहले सिर्फ आधार और वोटर आईडी कार्ड देखकर ही रजिस्ट्री कराई जाती थी. मामला सामने आने पर स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग पहले प्रॉपर्टी बेचने वाले की पहचान जानने के लिए खतौनी में नाम की जांच करेगा. फिर स्टाम्प निबंधन विभाग प्रॉपर्टी की मालिकाना हक की जांच करेगा. प्रॉपर्टी की मिल्कियत की जांच किए बगैर अब स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकेगा.
