Three prisoners lodged in Rohtak Jail will be released on August 15

रोहतक सुनारिया जेल
– फोटो : अमर उजाला


रोहतक के सुनारिया जेल में कैद चंद्रकला। एनडीपीएस एक्ट के तहत 10 साल की सजा। एक लाख रुपये जुर्माना भी। सजा तो पूरी कर ली पर मुफलिसी के चलते जुर्माना नहीं भर सकी। लिहाजा एक साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया। आजादी का दिन बरसों से मायूसी के दौर से गुजर रही महिला के जीवन में नई सुबह लेकर आएगा। बिहार से लगते नेपाल के परसा जिले के बीरगंज की चंद्रकला की यह दास्तान है। वह स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को सुनारिया जेल से रिहा होने वाले तीन कैदियों में शामिल है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तीन दिन पहले चंडीगढ़ में घोषणा की थी कि प्रदेश की जेलों में तीन ऐसे सजायाफ्ता कैदी हैं जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है, लेकिन वे गरीब होने के कारण जुर्माना देने में सक्षम नहीं हैं। उन्हें भी विशेष छूट का लाभ देकर 15 अगस्त को रिहा किया जाएगा।

पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक कलानौर थानाक्षेत्र में सीआईए स्टाफ की टीम ने 2013 में चंद्रकला को अन्य आरोपियों विनय व मनोज के साथ चरस सहित गिरफ्तार किया था। जिला अदालत में केस चला, जिसमें चंद्रकला को एनडीपीएस एक्ट के तहत 10 साल की सजा हुई।

तीन माह पहले चंद्रकला की सजा पूरी हो गई, लेकिन गरीबी के चलते वह एक लाख रुपये जुर्माना जमा नहीं करवा पा रही थी, लेकिन इस साल आजादी का पर्व सुनारिया जेल में बंद चंद्रकला के लिए खुशियों का पैगाम लाया हैै।

रेवाड़ी के रामबीर व धामड़ के बसंत को भी मिलेगी आजादी

सरकार की ओर से प्रदेश में 43 कैदियों को विशेष छूट देते हुए रिहा करने का निर्णय लिया गया है। इसमें 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सात कैदी हैं, जबकि तीन कैदी ऐसे हैं जो बिना छूट के अपनी वास्तविक सजा का 50 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर चुके हैं।

वहीं 33 ऐसे कैदी हैं जिन्होंने वास्तविक सजा अवधि में बिना छूट के दो-तिहाई या 66 प्रतिशत तक की सजा पूरी कर ली है। इसमें रोहतक जेल में बंद भगथाला (रेवाड़ी) निवासी रामबीर और धामड़ (रोहतक) निवासी बसंत भी शामिल हैं।

रामबीर ने पत्नी को मारी थी गोली, 10 साल की हुई सजा

राजस्थान के सिरोड निवासी राकेश ने 2016 में शिकायत दी थी कि उसकी बहन की शादी रेवाड़ी जिले के गांव बगथला निवासी रामबीर से हुई थी। रामबीर ने जमीन बेच दी, जिसका उसकी बहन ने विरोध किया। इस पर नाराज होकर रामबीर ने उसकी बहन को गोली मार दी जो उपचार के दौरान बच गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया था। उसे अदालत ने 10 साल की सजा व 7 हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया था। उसने न केवल जुर्माना भरा, बल्कि बिना छुट्टी के आधी से ज्यादा सजा पूरी कर ली। उसे भी सरकार ने रिहा करने का निर्णय लिया है।

अवैध पिस्तौल रखने पर बसंत को हुई थी एक साल की कैद

गांव धामड़ गांव निवासी बसंत के खिलाफ 2012 में सिटी थानाक्षेत्र में आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था, जिसमें उसकी बाद में गिरफ्तारी हुई। उसे अदालत ने एक साल कैद व एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। उसे भी रिहा करने का निर्णय लिया है।

15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर सुनारिया जेल के तीन कैदियों को छोड़ा जाएगा। इसमें बिहार निवासी चंद्रकला, धामड़ निवासी बसंत और बगथाला निवासी रामबीर शमिल हैं। चंद्रकला की सजा पूरी हो चुकी है, लेकिन जुर्माना न भरने के कारण जेल में ही बंद थी जबकि रामबीर व बसंत को विशेष रियायत दी गई है। तीनों का जेल में व्यवहार सही रहा। -सत्यवान सिंह, अधीक्षक सुनारिया जेल, रोहतक

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