कोलकाता : पश्चिम बंगाल के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की (Right To Appoint) नियुक्ति पर बढ़ते विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बृहस्पतिवार को राज्यपाल सी वी आनंद बोस के समर्थन में आते हुए कहा कि उनके पास राज्य के कुलपतियों की नियुक्ति का अधिकार है। प्रधान ने कहा कि राज्य सरकार को अपनी भूमिका पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में रैगिंग जैसी घटनाएं दोबारा न हों।

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Right To Appoint – उन्होंने कहा, अन्य राज्यों में राज्यपाल राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति करते हैं। पश्चिम बंगाल में राज्यपाल अपने अधिकार का इस्तेमाल कर कुलपतियों की नियुक्ति कर रहे हैं। राज्यपाल पर निशाना साधने के बजाय राज्य सरकार को परिसर को सुरक्षित बनाने और यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि यादवपुर विश्वविद्यालय में छात्र की मौत जैसी घटना दोबारा ना हो। केंद्रीय मंत्री यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की संगठनात्मक बैठक से इतर संवाददाताओं से बात कर रहे थे।

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प्रधान की यह टिप्पणी आठ राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यवाहक कुलपतियों की नियुक्ति और आठ अन्य के नाम सामने आने के फैसले को लेकर राज्य सरकार और राजभवन के बीच टकराव के मद्देनजर आई है। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल पर तीखा हमला करते हुए उन पर मानदंडों का उल्लंघन करने और विश्वविद्यालयों पर आर्थिक नाकेबंदी लगाने की धमकी देने का आरोप लगाया था। बनर्जी के अलावा राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु और सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के करीबी पूर्व कुलपतियों ने बोस पर नियमों का उल्लंघन करने और नियुक्तियों को आगे बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को दरकिनार करते हुए एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।

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