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    Home » रहमत, बरकत और मगफिरत वाले ‘माह-ए-रमजान’ का हुआ आगाज, इन 6 हिदायतों का जरूर रखें ध्यान!

    रहमत, बरकत और मगफिरत वाले ‘माह-ए-रमजान’ का हुआ आगाज, इन 6 हिदायतों का जरूर रखें ध्यान!

    March 2, 2025 धार्मिक 3 Mins Read
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    रमजान का महीना इस्लामिक (हिजरी) कैलेंडर का 9वां महीना होता है. ये महीना शाबान के महीने के बाद शुरू होता है. रमजान में रोजा रखने की शुरुआत चांद नजर आने के अगले दिन से (month e Ramadan started) होती है. साल 2024 में, 1 मार्च को चांद दिखने के बाद से भारत में रमजान की शुरुआत हो चुकी है. आज यानी 2 मार्च को रमजान का पहला रोजा रखा गया है.

     month e Ramadan started – रमजान के महीने को रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना कहा जाता है. रमजान में दुनियाभर के मुसलमान रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत में अपना ज्यादा समय बिताते हैं. रमजान में फज्र की नमाज से पहले मुसलमान भोजन खाते हैं, जिसे सहरी कहते हैं और फिर सूरज ढलने तक न तो कुछ खाते हैं और न ही पीते हैं. शाम को मगिरब की नमाज से पहले रोजा खोलते हैं, जिसे इफ्तार कहा जाता है. इसके साथ ही, रमजान के महीने में मुसलमान ईशा की नमाज के बाद तरावीह की नमाज भी पढ़ते हैं.

    सिर्फ रोजा रखना मकसद नहीं!

    इस्लाम धर्म के लिए रमजान का महीना बेहद पाक इसलिए भी माना गया है, क्योंकि इसी पाक महीने में पैगंबर साहब को अल्लाह से कुरआन की आयतें मिली थीं यानी कुरआन नाजिल हुआ था. रोजेदारों के लिए रमजान का महीना सिर्फ रोजे रखने के लिए नहीं होता, बल्कि इबादत और नेकी के कामों को बढ़ाने का बेहतरीन जरिया होता है.

    हर मुसलमान पर फर्ज है रोजा

    रमजान में रोजे रखना हर मुसलमान पर फर्ज होता है, क्योंकि रोजा इस्लाम धर्म के पांच बुनियादी हिस्सों में से एक हैं. कुछ मुसलमान रमजान में रोजे तो रखते हैं, लेकिन कुछ बातों को नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसा करने से रोजे का सवाब भी नहीं मिलता है. आइए आपको बताते हैं रमजान में रोजे के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

    रोजा रखने के बाद क्या क्या नहीं करना चाहिए?

    पूरे दिन सोने से बचें – अक्सर लोग रमजान में रोजा रखकर पूरे दिन सोते हैं और इफ्तार के टाइम उठकर रोजा खोल लेते हैं. लेकिन रमजान में रोजा रखकर पूरे दिन सोने से रोजे का कोई सवाब नहीं मिलता है. इसलिए रोजे में पूरे दिन सोने से बचना चाहिए.

    बुरे शब्दों का इस्तेमाल न करें – रोजा रखकर किसी को भी बुरा-भला नहीं कहना चाहिए और न ही किसी को लेकर बुरे शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए. रमजान में रोजा रखना अपनी नफ्स पर काबू रखने का बेहतरीन तरीका होता, इसलिए इसका ध्यान जरूर रखें.

    फिल्म/ड्रामा देखने से बचें – रमजान में रोजा रखकर कोई भी फिल्म, पाकिस्तानी ड्रामा या कुछ भी ऐसा देखने से बचना चाहिए. रोजे के दौरान अपना ज्यादा वक्त अल्लाह की इबादत में ही बिताएं और इन चीजों को देखने से बचें.

    रोजे में न छोड़ें नमाज – रमजान में रोजे की हालत में कुछ लोग सिर्फ सोए रहते हैं और अपनी नमाज छोड़ देते हैं, लेकिन अगर कोई शख्स रोजे में जानबूझकर नमाज छोड़ता है, तो उसको रोजे का कोई सवाब नहीं मिलता है. इसलिए रोजे में 5 वक्त की नमाज जरूर अदा करें.

    गुस्से से दूर रहें – रोजे की हालत में अपने वालिद-वालिदैन (माता-पिता) पर गुस्सा करने या ऊंची आवाज में बात नहीं करना चाहिए. अगर आप रोजे में किसी पर भी गुस्सा करते हैं या लड़ाई-झगड़ा करते हैं, तो ऐसे रोजे का कोई सवाब नहीं मिलता है.

    गाना सुनने से बचें – रोजे के दौरान रोजेदार को गाना सुनने से दूर रहना चाहिए. रोजा रखने का मतलब सिर्फ भूख रहना नहीं है, बल्कि रोजा अपनी नफ्स पर काबू रखने का भी नाम है. इसलिए रोजे की हालत में अपनी हर नफ्स पर काबू रखें और गाना सुनने या कुछ भी देखने से बचें.

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