पंजाब। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा लंबित डीए (DA)/डीआर (DR) के (Punjab High Court Notice to Govt) भुगतान से जुड़े अदालती आदेशों का अनुपालन करने में विफल रहने पर पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
Punjab High Court Notice to Govt – इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुग ने भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों के हक का पैसा रोकना तथा उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करना भगवंत मान सरकार की घोर संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता को पूरी तरह उजागर करता है।
3 अगस्त के आदेश का नहीं हुआ पालन
तरुण चुग ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि 3 अगस्त को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित डीए/डीआर की किस्तें केंद्रीय पैटर्न के अनुसार अविलंब जारी करने का सख्त निर्देश दिया था। अदालत ने भुगतान में देरी होने की स्थिति में 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी स्पष्ट आदेश दिया था और मुख्य सचिव को 31 अगस्त तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा था। इसके बावजूद समय सीमा के भीतर आदेश का पालन न होने पर अब उच्च न्यायालय को मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब करना पड़ा है।
विज्ञापन पर फिजूलखर्ची बंद करने की मांग
चुग ने बताया राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित डीए/डीआर की कुल बकाया राशि करीब ₹14,191 करोड़ बताई जा रही है। उन्होंने कहा जिन कर्मचारियों ने वर्षों तक पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था को संभाला, आज उन्हें ही अपने जायज हक के लिए आंदोलन करने और अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।


