चंडीगढ़। पंजाब के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने महंगाई भत्ते (DA) को लेकर आज एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। पंजाब सरकार और कर्मचारी यूनियनों के बीच लंबे समय से चला आ रहा DA विवाद आखिरकार सौहार्दपूर्ण माहौल में समाप्त हो गया है। चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, कैबिनेट मंत्रियों और ‘संझा मुलाजिम मंच’ के प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में सरकार ने कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए 8% महंगाई भत्ते (DA) की 4-4% की दो किश्तें तुरंत जारी करने का निर्णय लिया है, जो कर्मचारियों को आने वाली सैलरी के साथ मिलकर मिलेगी।
📊 42% से बढ़कर 50% हुआ महंगाई भत्ता: सरकारी खजाने पर पड़ेगा ₹248 करोड़ का बोझ
मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस अहम बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और ‘ज्वाइंट कोऑर्डिनेशन कमेटी’ के नेताओं ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसलों की आधिकारिक जानकारी दी।
इस नए फैसले के लागू होने के साथ ही पंजाब में कर्मचारियों का DA 42% से बढ़कर अब 50% हो गया है। हालांकि पंजाब सरकार के कर्मचारी 60% DA की मांग पर अड़े हुए थे, लेकिन बैठक के दौरान कर्मचारी नेताओं ने राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इस 8% DA बढ़ोतरी से पंजाब सरकार के खजाने पर प्रतिवर्ष लगभग ₹248 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
⚖️ हाईकोर्ट का कड़ा रुख और 6वें वेतन आयोग की सिफारिशें: जानिए क्या था पूरा मामला
उल्लेखनीय है कि पंजाब के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स लंबे समय से महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) की बकाया किस्तों और उनके एरियर के भुगतान की मांग कर रहे थे।
6वें पंजाब पे कमीशन (6th Punjab Pay Commission) ने भी अपनी सिफारिशों में DA को केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार ही जारी रखने का सुझाव दिया था। इसके बावजूद बकाए को लेकर मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया था। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार और PSPCL की अपीलों को खारिज करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था और लंबित DA/DR किस्तों को केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार तुरंत जारी करने के कड़े निर्देश दिए थे।
⏱️ 15 दिनों के भीतर भुगतान का था आदेश: देरी पर 6% साधारण ब्याज का प्रावधान
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि पंजाब में कार्यरत IAS, IPS और IFS अधिकारियों को जिस केंद्रीय दर से DA मिलता है, उसी तर्ज पर राज्य कर्मचारियों को भी बकाया भुगतान किया जाए।
अदालत ने राज्य सरकार को लंबित किस्तों का भुगतान 15 दिनों के भीतर करने का समय दिया था और चेतावनी दी थी कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होता है, तो बकाया राशि पर 6% वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख और चौतरफा दबाव के बाद आखिरकार मान सरकार ने कर्मचारियों के हित में यह बड़ा कदम उठाया है, जिससे राज्य के लाखों परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।


