प्रसिद्ध पोल स्ट्रैटेजिस्ट सुनील कोनुगोलू ने हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Punjab Congress Strategy) और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण प्रेजेंटेशन (रणनीतिक रिपोर्ट) दिया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस को जमीन पर यह साफ संदेश देना चाहिए कि पार्टी किसी एक स्थानीय चेहरे (इंडिविजुअल) के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नेतृत्व यानी खरगे और राहुल गांधी की अगुवाई में चुनाव लड़ने जा रही है. रणनीति का मुख्य उद्देश्य पंजाब कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चली आ रही आंतरिक गुटबाजी पर पूरी तरह विराम लगाना है.
🤝 तीन दिग्गज नेताओं का बनेगा ‘कॉम्बो
सुनील कोनुगोलू की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि तीन बड़े चेहरों का एक मजबूत ‘पॉलिटिकल कॉम्बो’ बनाने और उन्हें अलग-अलग महत्वपूर्ण भूमिकाएं सौंपने की सिफारिश की गई है:
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राणा गुरजीत: राणा गुरजीत को पार्टी केवल उनके और उनके बेटे के निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित न रखकर, आसपास की कम से कम 15 से 20 सीटों को जिताने की मुख्य जिम्मेदारी सौंपे. रिपोर्ट में यह भी सलाह दी गई है कि गुरजीत को अपने और सुखपाल सिंह खैरा के पुराने विवाद को पीछे छोड़कर पूरी तरह पार्टी हित में काम करना होगा.
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चरणजीत सिंह चन्नी: रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब कांग्रेस का सबसे बड़ा ‘एसेट’ और ‘क्राउड पुलर’ (भीड़ जुटाने वाला नेता) बताया गया है. चन्नी को जालंधर और आनंदपुर साहिब क्षेत्र की सीटों की कमान सीधे अपने हाथों में लेने को कहा गया है. रणनीतिकारों के अनुसार, चन्नी अगर पूरी ताकत से मैदान में उतरते हैं, तो वे अकेले 20 से अधिक सीटों पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं.
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विजेंदर सिंघला: सिंघला को पंजाब के हिंदू वोट बैंक को साधने के लिए बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की बात कही गई है. उन्हें राज्य की मैनिफेस्टो कमेटी (घोषणापत्र समिति) का हेड नियुक्त किया जा सकता है.
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📊 घर वापसी और ’50 प्लस’ सीटों का गणित
रिपोर्ट में ‘स्ट्रैटेजिक रिइंडक्शन’ (Strategic Reinduction) की नीति अपनाने की सलाह दी गई है, यानी जो पुराने और रसूखदार नेता पूर्व में कांग्रेस छोड़कर दूसरी पार्टियों में जा चुके हैं, उन्हें उनके मजबूत वोट बैंक के आधार पर दोबारा सम्मान के साथ पार्टी में वापस लाया जाए. इसके अलावा, कांग्रेस को जनता के बीच यह माहौल (Punjab Congress Strategy) बनाना है कि पार्टी आसानी से ’50 प्लस’ (50 से अधिक) सीटें जीत रही है.


