डॉक्टरों को भगवान का रूप माना जाता है. लेकिन चंडीगढ़ के एक प्रतिष्ठित प्राइवेट अस्पताल से जो मामला सामने आया है, उसने हेल्थकेयर इंडस्ट्री के एक काले और डरावने सच को उजागर कर दिया है. एक महिला डॉक्टर, डॉ. प्रभलीन कौर ने नैतिकता की मिसाल पेश करते हुए नौकरी के पहले ही दिन इस्तीफा दे दिया. उनका (exposed loot of private hospital) आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों को इलाज के नाम पर सिर्फ लूट का जरिया समझ रहा था.
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में डॉ. प्रभलीन कौर ने अस्पताल के भीतर होने वाले खेल का पर्दाफाश किया. उन्होंने बताया कि उन्होंने एक बहुत ही जाने-माने और प्रतिष्ठित अस्पताल में बतौर फिजिशियन जॉइन किया था. उन्हें उम्मीद थी कि वहां रहकर वे मरीजों की सेवा करेंगी, लेकिन पहले ही दिन उन्हें अहसास हो गया कि अस्पताल को एक डॉक्टर की नहीं, बल्कि एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जिसके नाम पर गलत काम किए जा सकें.
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डॉक्टर ने वीडियो में कहा- अस्पताल की ओनर, जो खुद एक गाइनोकॉलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) हैं, वह फिजिशियन न होते हुए भी खुद तय करती थीं कि किस मरीज को भर्ती करना है और किसे नहीं. सबसे चौंकाने वाली बात ये थी कि मरीजों को बेवजह जितने लंबे समय तक संभव हो, ICU में रखने का दबाव बनाया जा रहा था.
exposed loot of private hospital – डॉ. प्रभलीन ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा के नियमों के अनुसार मरीज की स्थिति देखकर फिजिशियन तय करता है कि उसे ICU की जरूरत है या नहीं. लेकिन यहां प्रबंधन की मंशा सिर्फ बिल बढ़ाना था. उन्होंने कहा- गलत काम वे कर रहे थे, लेकिन फाइल पर हस्ताक्षर मेरे होते. यानी नाम मेरा खराब होता और फायदा उनका. मैंने तय किया कि मैं अपने कंधे पर किसी को बंदूक रखकर चलाने नहीं दूंगी.


