नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की समुद्री क्षमता को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा है कि इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए हम नीतिबद्ध तरीके से काम (Port Capacity Doubled) कर रहे हैं। इसी के फलस्वरूप पिछले एक दशक में प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता दोगुनी हो गई है। बंदरगाहों पर कंटेनरों के टर्न-अराउंड समय में तेजी से कमी आई है। प्रधानमंत्री मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट (जीएमआईएस) 2023 के तीसरे संस्करण के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इसे भी पढ़ें – लोगों ने कांग्रेस की सरकार रिपीट करने का मन बना लिया : गहलोत
मुंबई में आयोजित यह शिखर सम्मेलन देश के समुद्री क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करता है। प्रधानमंत्री ने ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट के तीसरे संस्करण में सभी का स्वागत किया। उन्होंने याद किया कि जब 2021 में शिखर सम्मेलन हुआ था तो कैसे पूरी दुनिया कोविड महामारी की अनिश्चितताओं से जूझ रही थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक नई दुनिया आज आकार ले रही है। बदलती विश्व व्यवस्था में प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि दुनिया नई आकांक्षाओं के साथ भारत की ओर देख रही है।
इसे भी पढ़ें – अग्निवीर अमृतपाल ने आत्महत्या की थी, इसलिए नियमानुसार सैन्य सम्मान नहीं : सेना
Port Capacity Doubled – उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रही दुनिया में भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन जाएगा। वैश्विक व्यापार में समुद्री मार्गों की भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कोरोना के बाद की दुनिया में एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति शृंखला की आवश्यकता पर जोर दिया।मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया। उन्होंने प्रस्तावित भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारे पर ऐतिहासिक जी-20 के देशों की सर्वसम्मति के परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जैसे अतीत के सिल्क रूट ने कई देशों की अर्थव्यवस्था बदल दी, वैसे ही यह गलियारा भी वैश्विक व्यापार की तस्वीर बदल देगा।

