Pangolian Smuggling: पैंगोलिन एक ऐसा जानवर है, जिसकी दुनिया में सबसे ज्यादा तस्करी हो रही तस्करी की वजह है चीन, जहां इस जानवर की खाल और मांस से पारंपरिक दवाएं बनाए जा रही हैं. इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के मुताबिक दुनियाभर के वन्य जीवों की अवैध तस्करी में अकेले 20 फीसदी का योगदान पैगोलिन का ही है।

धड़ल्ले से होती आई तस्करी
सांप, छिपकली की तरह दिखने वाला ये जीव स्तनधारी जीवों की श्रेणी में आता है दशकों से दुनियाभर के देशों से इसकी तरकरी हो रही है और तस्करी के जरिए पैंगोलिन चीन या फिर वियतनाम पहुंच रहे हैं यहां इस जीव की दवाएं बनाई जाती हैं, जो काफी महंगे दामों पर चीन के कोने-कोने में अमीरों तक पहुंचती हैं. हालत ये हुई कि पैंगोलिन विलुप्त होने वाले जीवों की श्रेणी में पहुंच गए.

चीन ने रोक की पहल की
काफी विरोध के बाद साल 2020 के जून में चीन ने पैंगोलिन को अपनी पारंपरिक दवाओं की सामग्री को लिस्ट से हटाया. पैंगोलिन को सामग्री की लिस्ट से तो हटा दिया गया लेकिन अब भी pharma copoeia की लिस्ट में इसके होने का डर है. pharmacopoeia चीनी दवाओं की सामग्री के ही हवाले से इस्तेमाल होने वाली टर्म है तो हो रहा है कि आधिकारिक तौर पर भले ही चीन अपनी पारंपरिक दवाओं में पैंगोलिन को गायब दिखाए लेकिन अंदर कोई गड़बड़ हो सकती है. पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था इनवायरमेंट इनवेस्टिगेशन एजेसी (EIA) ने इस बारे में पहले ही संदेह जता दिया था. ये शर्मीले जीव धरती पर लगभग 60 मिलियन वर्षों से पाए जाते हैं.ये चीटियां खाकर गुजारा करते हैं.

Pangolian Smuggling: एक किलो की कीमत 27000 रुपए शरीर पर कड़ी और सुनहरी-भूरी स्कल वाले इन जीतो का मांस खूब शौक से खाया जाता है. इसके एक किलो की कीमत लगभग 27,000 रुपए तक होती है, इसलिए चीन में ये एग्जॉटिक जानवरों की श्रेणी में मिलता है. यानी मार्केट में दूसरे कम कीमत के सस्ते जीवों के साथ पैंगोलिन नहीं बिकता, बल्कि महंगे रेस्त्रां ही इसे बेचते या पकाते हैं.
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Pangolian Smuggling: बनती हैं कई किस्म की दवाएं इसका दूसरा और सबसे ज्यादा इस्तेमाल ट्रेडिशनल चाइनीज मैडिसिन (TCM) में होता है. चीनी दवाओं का कारोबार लगभग 130 बिलियन डॉलर का माना जाता है. इसके तहत कई तरह के जगली जानवरों से दवाएं बनाई जाती है, जैसे पैंगोलिन के अलावा साप, बिच्छू, मकड़ी और कॉक्रोच. पैंगोलिन के मांस से अलग दवाएं बनती हैं तो इसके स्केल्स से अलग किस्म की दवा बनती है. हर दवा का उपयोग अलग बीमारी के लिए होता है. पैंगोलिन के स्केल्स यानी शरीर की ऊपरी कड़ी परत से बनने वाली दवाएं चॉकलेट के बार की तरह दिखती है लेकिन काफी कठोर होती है. इसे गर्म पानी या अल्कोहल में घोलकर पिया जाता है. टरेडिनशल मेडिसिन बनाने वाले इसे धूप में सुखाकर कैप्सूल में बदलते हैं और फिर इसे भारी कीमत पर बेचा जाता है.
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