रांची : झारखंड में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को लंबे समय से ओपन जेल में परिवार के साथ रहने का अवसर मिलता रहा है। अब राज्य सरकार इस सुधारात्मक व्यवस्था का दायरा सामान्य बंदियों तक बढ़ाने जा रही है। जेल में लगातार अच्छा आचरण प्रदर्शित करने वाले और सुधार की राह पर आगे बढ़ चुके अन्य बंदियों (open jail system for prisoners) को भी अपने परिवार के साथ रहने और दिन में जेल से बाहर निकलकर आजीविका कमाने की अनुमति मिल सकेगी।
सुबह काम पर निकलेंगे, शाम को बैरक लौटेंगे
निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले बंदी (open jail system for prisoners) सुबह लगभग 6:00 बजे जेल परिसर से बाहर जाकर अपनी नौकरी अथवा दैनिक व्यवसाय कर सकेंगे और शाम 6:00 से 7:00 बजे तक वापस बैरक में लौटेंगे। इस व्यवस्था से बंदियों को नया कौशल सीखने, आजीविका चलाने और अपनी मेहनत की कमाई से स्वावलंबी बनने का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा।
परिवार के साथ रहकर जीवन बिताने की छूट
ओपन करेक्शनल व्यवस्था की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि चयनित कैदी अपने परिवार के साथ रहकर सामान्य पारिवारिक जीवन व्यतीत कर सकेंगे। बाहर काम करके बंदी अपने बच्चों की पढ़ाई, भोजन और परिवार के दैनिक खर्चों की जिम्मेदारी खुद वहन करेंगे, जिससे उनमें सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना जाग्रत होगी।


