त्वचा की देखभाल के लिए आज हजारों रुपये के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स और महंगे (Natural Skin Care Tips) ट्रीटमेंट्स उपलब्ध हैं। पुराने समय में जब ये आधुनिक प्रोडक्ट्स चलन में नहीं थे, तब लोग पूरी तरह प्राकृतिक और हर्बल चीजों पर भरोसा करते थे। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, प्रदूषण और रासायनिक उत्पादों के नुकसान से बचने के लिए दोबारा पारंपरिक नुस्खों की तरफ लौटना एक सुरक्षित और स्थायी विकल्प है।

 1. मुल्तानी मिट्टी का लेप 

पुराने समय से मुल्तानी मिट्टी का उपयोग त्वचा को गहराई से साफ करने और उसे कोमल बनाने के लिए किया जाता रहा है। धूप और गर्मी के कारण लाल या झुलसी हुई त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी बेहद सुकून देने वाली मानी जाती है। मुल्तानी मिट्टी को कुछ देर साफ पानी में भिगोकर रखें या इसके महीन पाउडर में गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद ताजे पानी से धो लें।

 2. असली चंदन का लेप 

आज बाजार में कई तरह के मिलावटी चंदन पाउडर मिलते हैं, लेकिन पारंपरिक तरीके से असली चंदन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर ताजा लेप तैयार किया जाता था। यह लेप मुंहासों, दाग-धब्बों और त्वचा की जलन को शांत करने में रामबाण साबित होता है।अत्यधिक गर्मी या मानसिक तनाव के कारण होने वाले सिरदर्द में माथे पर चंदन का लेप लगाने से तुरंत ठंडक और आराम मिलता है।

3. कुमकुमादी तैलम से पाएं पोषण

पुराने समय में केमिकल युक्त मॉइस्चराइजर की जगह शुद्ध तेलों से चेहरे और शरीर की मालिश की जाती थी, जिससे त्वचा को पर्याप्त नमी और प्राकृतिक पोषण मिलता था। आयुर्वेद में वर्णित कुमकुमादी तैलम का नियमित प्रयोग त्वचा की रंगत निखारने, झुर्रियों को रोकने और चेहरे पर प्राकृतिक ग्लो लाने के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

4. दूध की ताजी मलाई 

दूध की ताजी मलाई में चुटकीभर हल्दी पाउडर मिलाकर चेहरे, गर्दन और हाथ-पैरों पर लगाएं। इसे लगाने के कुछ मिनट बाद हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में मसाज करते हुए साफ करें और फिर सादे गुनगुने या ताजे पानी से धो लें। यह प्राकृतिक रेमेडी विशेषकर रूखी (Dry Skin) त्वचा वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है, जिससे त्वचा बिना किसी चिपचिपाहट के नर्म और चमकदार बनती है।

 

 

 

 

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