म्यूचुअल फंड्स ने मार्च में लगभग 55,413 करोड़ रुपये के फाइनेंशियल स्टॉक्स खरीदे, जो उस महीने सेकेंडरी मार्केट में उनके कुल इनफ्लो का 49 प्रतिशत था. यह तब हुआ जब US-ईरान-इज़राइल तनाव के बीच भारतीय बाजारों में भारी गिरावट देखी गई. म्यूचुअल फंड्स सेकेंडरी मार्केट में एक्टिव खरीदार रहे, और उन्होंने मार्च में (Mutual Funds Investment) लगभग 1.13 लाख करोड़ रुपये के स्टॉक्स खरीदे. खरीदारी के बावजूद, म्यूचुअल फंड्स की कुल एसेट वैल्यू फरवरी के 51.29 लाख करोड़ रुपये से घटकर 46.6 लाख करोड़ रुपये रह गई. हालांकि, कुल मार्केट कैप में म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी एक महीने पहले के 11.1 प्रतिशत से बढ़कर 11.3 प्रतिशत हो गई.
Mutual Funds Investment – बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली के बावजूद फाइनेंशियल स्टॉक्स में जोरदार खरीदारी देखने को मिली. मार्च में निफ्टी बैंक 17 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 15.6 प्रतिशत की गिरावट आई. दोनों इंडेक्स ने मार्च 2020 के बाद से अपनी सबसे बड़ी मंथली गिरावट दर्ज की. फाइनेंशियल स्टॉक्स पर दबाव बना रहा, क्योंकि इस बात की चिंता थी कि सॉवरेन बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बैंकों के सरकारी सिक्योरिटीज पोर्टफोलियो पर ‘मार्क-टू-मार्केट’ नुकसान हो सकता है. मार्च में भारत की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 37 बेसिस पॉइंट्स से ज्यादा बढ़कर 7 प्रतिशत के पार चली गई, जो एक साल का हाई लेवल था.
यहां भी हुई खरीदारी
फाइनेंशियल स्टॉक्स के अलावा म्यूचुअल फंड्स ने कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी स्टॉक्स में भी जोरदार खरीदारी की, जहां उन्होंने 16,366 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. टेलीकॉम स्टॉक्स में 14,656 करोड़ रुपये का इनफ्लो हुआ, जबकि IT स्टॉक्स में 5,717 करोड़ रुपये का निवेश आया. म्यूचुअल फंड्स की खरीदारी वाले अन्य बड़े सेक्टरों में कमोडिटीज 4,883 करोड़ रुपये, हेल्थकेयर 4,178 करोड़ रुपये और इंडस्ट्रियल्स 4,139 करोड़ रुपये शामिल थे. FMCG स्टॉक्स में 3,795 करोड़ रुपये का इनफ्लो हुआ, जबकि सर्विसेज सेक्टर में 3,548 करोड़ रुपये का निवेश आया.


