महाराष्ट्र के पुणे में एमपीएससी (MPSC) अभ्यर्थियों का पिछले 11 दिनों से चला आ रहा कड़ा आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग केवल पेपर लीक की जांच तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि वे आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे और पूरी भर्ती प्रक्रिया में सख्त जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़े हुए थे। सरकार की ओर से पहले जांच का भरोसा दिए जाने के बावजूद गतिरोध लगातार बना हुआ था। आखिरकार रविवार रात हुई लंबी बैठकों और वार्ताओं के बाद ऐसा क्या बदलाव आया कि छात्र आंदोलन स्थगित करने के लिए तैयार हो गए, आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की अंदरूनी कहानी।
⚖️ अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग पर फंसी थी बातचीत और संवैधानिक पेच
एमपीएससी के खिलाफ शुरू हुआ यह प्रदर्शन धीरे-धीरे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और आयोग की जवाबदेही का एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन गया। ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोपों और अन्य अनियमितताओं को लेकर छात्रों ने कड़े सवाल उठाए थे।
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सरकार की दलील: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया था कि एमपीएससी अध्यक्ष को सीधे तौर पर सरकार के आदेश से नहीं हटाया जा सकता, क्योंकि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत निर्धारित एक लंबी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
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सरकार का यह भी तर्क था कि विवादित पेपर लीक का मामला अध्यक्ष के मौजूदा कार्यकाल से पहले का है। इसी वैधानिक पेच और छात्रों की तुरंत कार्रवाई की जिद के कारण बातचीत के कई दौर बेनतीजा साबित हुए थे।
🤝 रविवार रात की मैराथन बैठक और बीच का रास्ता
11 अक्टूबर की रात मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले आंदोलन स्थल पर पहुंचे। उनके साथ विधायक रोहित पवार, विश्वजीत कदम और छात्र प्रतिनिधियों के बीच गहन चर्चा हुई।
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अस्थायी समाधान: चूंकि सीधे इस्तीफे पर सहमति नहीं बन पा रही थी, इसलिए बीच का रास्ता निकालते हुए सरकार ने अध्यक्ष विवेक भीमनवार को जांच पूरी होने तक छुट्टïी पर भेजने का बड़ा फैसला लिया।
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जांच आयोग का गठन: सरकार ने मामले की निष्पक्ष पड़ताल के लिए पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच आयोग का गठन किया है, जिसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को सचिव बनाया गया है। इस आयोग को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
📋 भर्ती और पुलिस मामलों पर भी मिले आश्वासन
अध्यक्ष के मुद्दे के अलावा सरकार ने अन्य मांगों पर भी सकारात्मक रुख दिखाया:
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अगले तीन वर्षों में 70 हजार रिक्त पद भरने और 2027 की ग्रुप-C भर्ती में पदों की संख्या दोगुनी करने का आश्वासन दिया गया।
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आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों और छात्रों पर दर्ज किए गए पुलिस मामलों को वापस लेने पर भी सहमति बनी।
इन सभी आश्वासनों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के बाद 12 अक्टूबर की देर रात छात्र प्रतिनिधियों ने आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने की घोषणा कर दी। हालांकि, छात्रों की मूल मांग स्थायी इस्तीफे की थी, इसलिए अब सबकी निगाहें जांच आयोग की रिपोर्ट और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हैं।


