उत्तरकाशी के धराली गांव में जिंदगी की उम्मीद को लेकर महा रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी. उत्तरकाशी में मौसम भी अब साथ देने लगा है. साफ मौसम की वजह से गुरुवार सुबह से ही रेस्क्यू शुरू हो गया है. पूरा रेस्क्यू अब हेली सेवा पर निर्भर है. प्रभावित लोगों को निकालने की कवायत जारी है. 11 जवानों समेत 13 लोगों को (glacier molted with humid) एयर लिफ्ट किया गया है. इस बीच मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि क्यों ये त्रासदी आई.

glacier molted with humid  – मौसम विभाग के डायरेक्टर डॉक्टर विक्रम सिंह के मुताबिक- मंगलवार को दिनभर नें सिर्फ 2.7mm बारिश हुई थी, जो कि सामान्य थी. फिर भी तबाही आ गई. इसकी बड़ी वजह श्रीखंड पर्वत पर मौजूद हैंगिंग ग्लेशियर हो सकते हैं. वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिक प्रोफेसर डॉक्टर एसपी सती की मानें तो यह आपदा मौसमीय नहीं, बल्कि भूगर्भीय और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी है.

ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा

एसपी सती ने बताया- ट्रांस हिमालय में लगातार तापमान बढ़वे से ऊपर मौजूद हैंगिंग ग्लेशियर पिघल रहे हैं. ये ग्लेशियर खड़ी ढलानों पर टिके रहते हैं. ऐसे ग्लेशियर श्रीखंड पर्वत पर भी हैं. पूरी संभावना है कि बारिश और उमस में ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा, जो ऊपर मौजूद 2-3 झीलों को तोड़ता हुआ आगे बढ़ा. इसलिए पहाड़ के टुकड़े इतने वेग के साथ बहकर धराली पहुंचे.

400 लोगों का किया गया रेस्क्यू

धराली गांव में सैलाब आने से 30 से 50 फीट तक मलबा जमा हो गया है. माना जा रहा है कि 150 लोग अभी भी मलबे में दबे हो सकते हैं. अब तक 400 लोगों को बचाया जा चुका है. सेना के लापता 11 जवानों का भी रेस्क्यू कर लिया गया है. रेस्क्यू टीमों को हेलीकॉप्टर की मदद से धराली पहुंचाया गया है. खराब मौसम के कारण दो दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन में कई दिक्कतें आईं. मगर गुरुवार को सुबह मौसम ने भी साथ दिया. साफ मौसम में एक बार फिर रेस्क्यू जारी किया गया है. हालांकि, ग्लेशियर बार-बार फट रहे हैं और मलबा भी नीचे आ रहा है.

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