राष्ट्रीय राजधानी से सटे उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्वास्थ्य सेवाओं और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। यहां डेल्टा-1 स्थित एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा टाइफाइड बुखार से पीड़ित एक बच्चे को गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर डायलिसिस की सलाह दे दी गई, जिससे पूरा परिवार सदमे में आ गया। इस मामले में पीड़ित परिवार की शिकायत और अदालत के सख्त आदेश के बाद सूरजपुर थाना पुलिस ने अस्पताल के प्रबंध निदेशक (MD), संबंधित डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
🩺 यूरिया और सोडियम का स्तर बढ़ाकर दिखाने का आरोप, दूसरे अस्पताल में जांच कराने पर खुली पोल
शिकायतकर्ता और पीड़ित के वकील सचिन बिधूड़ी के अनुसार, उन्होंने 20 सितंबर 2025 को अपने बेटे सात्विक को बुखार की शिकायत के बाद इस अस्पताल में भर्ती कराया था। अस्पताल की लैब से आई खून की जांच रिपोर्ट में यूरिया, पोटेशियम और सोडियम का स्तर अत्यधिक बढ़ा हुआ दिखाया गया, जिसके आधार पर डॉक्टरों ने बच्चे की किडनी खराब होने का डर दिखाते हुए उसे तुरंत आईसीयू में भर्ती करने और डायलिसिस पर रखने का दबाव बनाया। जब परिजनों ने इस रिपोर्ट की पुष्टि के लिए दूसरे अस्पताल में दोबारा जांच कराई, तो वहां सात्विक की सभी रिपोर्ट बिल्कुल नॉर्मल आईं।
⚖️ पुलिस स्तर पर सुनवाई न होने पर कोर्ट पहुंचे परिजन, इश्तगासा दाखिल कर दर्ज कराया मुकदमा
लापरवाह अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ स्थानीय थाने में कोई ठोस कार्रवाई न होने पर परिजनों ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत में इश्तगासा दाखिल कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई, जिसके बाद न्यायालय के आदेश पर सूरजपुर पुलिस ने धोखाधड़ी और गंभीर लापरवाही से जुड़े प्रावधानों के तहत अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों और डॉक्टरों के विरुद्ध कानूनी शिकंजा कस दिया है।


