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    Home » Ludhiana Cyber Fraud: दिन में बेचता था सब्जी, रात को बनता था इंटरनेशनल साइबर ठग; लुधियाना में मुनीश के नेटवर्क का भंडाफोड़

    Ludhiana Cyber Fraud: दिन में बेचता था सब्जी, रात को बनता था इंटरनेशनल साइबर ठग; लुधियाना में मुनीश के नेटवर्क का भंडाफोड़

    May 18, 2026 पंजाब 7 Mins Read
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    लुधियाना: पंजाब के लुधियाना में सामने आए करोड़ों रुपए के हाई-टेक साइबर फ्रॉड मामले ने पूरे शहर को हैरान कर दिया है। जिस युवक को स्थानीय लोग रोज मंडी और दुकान पर साधारण तरीके से सब्जी बेचते देखते थे, वही विदेशों में बैठे लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाने वाले एक बहुत बड़े इंटरनेशनल नेटवर्क का मुख्य मास्टरमाइंड निकला। लुधियाना पुलिस ने मुख्य आरोपी की पहचान मुनीश के रूप में की है, जो समाज के सामने बाहर से बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय जीवन जीता दिखाई देता था। लुधियाना पुलिस की इस अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में नेटवर्क से जुड़े 140 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि इस रैकेट के कई अन्य सदस्यों की सरगर्मी से तलाश जारी है।

    🏪 दिन में संभालता था 50 साल पुरानी दुकान, रात को खेलता था साइबर फ्रॉड का खेल: साधारण पहचान को बनाया था सबसे बड़ी ढाल

    स्थानीय निवासियों के मुताबिक, आरोपी मुनीश रोज सुबह अपने परिवार की सब्जी की दुकान पर बैठता था। पूरे इलाके में उसकी पहचान एक सीधे, शांत और बेहद मेहनती युवक के रूप में बनी हुई थी। दुकान पर रोजाना आने-जाने वाले ग्राहकों को कभी सपने में भी अंदाजा नहीं हुआ कि वही युवक रात के समय एक बड़े इंटरनेशनल साइबर गैंग को ऑपरेट करता है। बताया जा रहा है कि आरोपी का परिवार पिछले कई दशकों से सब्जी बेचने का काम कर रहा है और उनकी यह दुकान करीब 50 साल पुरानी है। पुलिस जांच में सामने आया कि मुनीश ने समाज और पुलिस की नजरों से बचने के लिए इसी साधारण पारिवारिक पहचान को अपनी सबसे बड़ी और मजबूत ढाल बना रखा था।

    📞 पुलिस को मिली थी फर्जी कॉल सेंटरों की गुप्त सूचना: पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा के नेतृत्व में कमर्शियल परिसरों पर हुई ताबड़तोड़ रेड

    लुधियाना के पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि खुफिया विंग को एक पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी कि शहर के कुछ वीआईपी इलाकों में अवैध और फर्जी कॉल सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं, जहां से अमेरिकी और अन्य विदेशी नागरिकों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। सटीक सूचना के बाद पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन कर गुप्त जांच शुरू की। इसके बाद शहर के कई संदिग्ध कमर्शियल परिसरों में एक साथ छापेमारी (रेड) की गई। रेड के दौरान दर्जनों युवक-युवतियां हाई-टेक कंप्यूटर सिस्टम पर लाइव काम करते हुए रंगे हाथों मिले। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में लैपटॉप, मोबाइल फोन, विदेशी बैंक रिकॉर्ड और विदेशी नागरिकों का गोपनीय डेटा बरामद किया।

    💻 बेहद शातिर और प्रोफेशनल तरीके से करते थे काम: माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों के नाम पर भेजते थे फर्जी वायरस अलर्ट

    पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने बताया कि आरोपियों का काम करने का तरीका बेहद शातिर और कॉरपोरेट स्तर का था। आरोपी विदेशी नागरिकों के कंप्यूटर सिस्टम पर इंटरनेट सर्फिंग के दौरान अचानक फर्जी वायरस और सिक्योरिटी थ्रेट अलर्ट भेजते थे। इस फर्जी स्क्रीन पर माइक्रोसॉफ्ट और नामी एंटी-वायरस कंपनियों के लोगो और नाम का अवैध इस्तेमाल किया जाता था ताकि विदेशी लोग आसानी से उन पर भरोसा कर लें। इसके बाद आरोपी खुद को उन कंपनियों का सर्टिफाइड टेक्निकल सपोर्ट अधिकारी बताकर बात करते थे और फिर समस्या ठीक करने के नाम पर रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाकर उनके पूरे सिस्टम का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते थे। कमिश्नर के मुताबिक, आरोपियों की अंग्रेजी और बात करने का लहजा इतना प्रोफेशनल था कि विदेशी लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते थे।

    💰 1 करोड़ से ज्यादा की नकदी और लग्जरी गाड़ियां बरामद: करोड़ों के ट्रांजैक्शन वाले सैकड़ों बैंक खातों को पुलिस ने किया फ्रीज

    क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने इस संयुक्त कार्रवाई के दौरान मौके और आरोपियों के ठिकानों से करीब 1 करोड़ रुपए से ज्यादा की भारी-भरकम नकद राशि, 98 हाई-एंड लैपटॉप, 229 स्मार्टफोन और कई कीमती लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं। इसके अलावा, देश-विदेश के सैकड़ों बैंक खातों से जुड़े अहम दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं। जांच एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन सभी बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया है ताकि पैसों के आगे के लेन-देन को रोका जा सके। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क के जरिए विदेशों से ठगी गई करोड़ों रुपए की राशि विभिन्न माध्यमों से भारत लाई गई थी।

    📥 AnyDesk और UltraViewer ऐप के जरिए लेते थे सिस्टम का कंट्रोल: रिमोट एक्सेस मिलते ही उड़ा देते थे बैंक खातों से पैसे

    तकनीकी जांच में सामने आया कि आरोपी जैसे ही पीड़ित विदेशी नागरिकों के कंप्यूटर स्क्रीन पर नकली वायरस का पॉप-अप भेजते थे, डर के मारे लोग स्क्रीन पर दिए गए टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर बैठते थे। इसके बाद कॉल सेंटर की ऑपनर टीम खुद को टेक्निकल स्टाफ बताकर पीड़ितों के कंप्यूटर में AnyDesk, TeamViewer और UltraViewer जैसी रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवा देती थी। जैसे ही यह ऐप इंस्टॉल होती थी, लुधियाना में बैठे ठगों के पास उस कंप्यूटर का पूरा कंट्रोल आ जाता था। इसके बाद वे बैकएंड से पीड़ित की नेट बैंकिंग जानकारी, क्रेडिट कार्ड डिटेल्स, पासवर्ड और निजी डेटा हासिल कर उनके खातों को साफ कर देते थे।

    💵 ‘गैरकानूनी कंटेंट’ का डर दिखाकर वसूलते थे हजारों डॉलर: मानसिक दबाव बनाकर लोगों को करते थे कंगाल

    पुलिस के अनुसार, यह गैंग केवल तकनीकी खराबी का झांसा नहीं देता था, बल्कि कई बार लोगों को कानूनी पचड़ों का डर दिखाकर भी ब्लैकमेल करता था। आरोपी पीड़ितों को यह कहकर डराते थे कि उनके सिस्टम में गंभीर गैरकानूनी कंटेंट पाया गया है या उनका फेडरल बैंक अकाउंट हमेशा के लिए बंद होने वाला है। इस कानूनी कार्रवाई से घबराए हुए विदेशी नागरिक मामले को दबाने के लिए तुरंत बताए गए खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते थे। कई मामलों में एक-एक व्यक्ति से हजारों डॉलर तक वसूले गए। पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क पूरी तरह से मानसिक दबाव और डर का माहौल बनाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाता था।

    🏢 प्रोफेशनल कॉरपोरेट कंपनी की तरह बंटा था काम: ‘ऑपनर’ और ‘क्लोजर’ टीमों को मिलती थी मोटी सैलरी और इंसेंटिव

    पुलिस की गहन जांच में पता चला कि इस पूरे अवैध नेटवर्क को किसी प्रोफेशनल मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) या कॉल सेंटर की तरह ऑपरेट किया जा रहा था। नेटवर्क के भीतर “ऑपनर टीम” का काम केवल भोले-भले लोगों को अपनी बातों के जाल में फंसाना होता था, जबकि इसके बाद की तकनीकी और शातिर “क्लोजर टीम” पैसों का फाइनल ट्रांसफर और उगाही करवाती थी। हर टीम में दर्जनों युवक-युवतियां शामिल थे, जिन्हें अंग्रेजी बोलने की दक्षता के आधार पर रखा गया था। सूत्रों के मुताबिक, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बेरोजगार युवाओं को जल्दी और बिना मेहनत के मोटा पैसा कमाने का लालच देकर इस दलदल में शामिल किया जाता था और उन्हें मोटी सैलरी के साथ-साथ हर सफल ठगी पर भारी इंसेंटिव भी दिया जाता था।

    🪙 हवाला नेटवर्क और क्रिप्टो लिंक की जांच में जुटी टीमें: आने वाले दिनों में हो सकते हैं कई और बड़े राष्ट्रीय खुलासे

    लुधियाना पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां अब इस बात की गहनता से तफ्तीश कर रही हैं कि विदेशों से ठगी गई यह ब्लैक मनी किस रूट से भारत आ रही थी। शुरुआती वित्तीय जांच में इस अवैध कमाई को सफेद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) के इस्तेमाल के पुख्ता इनपुट मिले हैं। पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने कहा कि मामले की वित्तीय और तकनीकी जांच अभी जारी है। आरोपियों के मोबाइल और लैपटॉप को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, जिससे आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय इस गैंग के मददगारों और बड़े चेहरों के बेनकाब होने की पूरी उम्मीद है।

    ⚠️ साइबर अपराधियों से बचने के लिए लुधियाना पुलिस की विशेष अपील: किसी भी अनजान व्यक्ति को न दें कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस

    इस व्यापक कार्रवाई के बाद, लुधियाना पुलिस ने आम जनता और इंटरनेट उपभोक्ताओं से विशेष अपील की है कि वे किसी भी अनजान या संदिग्ध टेक्निकल सपोर्ट कॉल, पॉप-अप मैसेज या ईमेल लिंक पर कतई भरोसा न करें। पुलिस ने साफ कहा है कि माइक्रोसॉफ्ट, गूगल या कोई भी प्रतिष्ठित बैंक कभी भी इस तरह से स्क्रीन पर नंबर देकर कॉल करने को नहीं कहता। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने मोबाइल या कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस (जैसे AnyDesk आदि) भूलकर भी न दें। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी अब बेहद आधुनिक और मनोवैज्ञानिक तरीके अपना रहे हैं, इसलिए डिजिटल युग में हर नागरिक को अत्यधिक सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है।

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