Kisan Sangh news: कृषि विशेषज्ञों ने बुधवार को कहा कि गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा होने के बाद प्रदर्शनकारी किसान संघों का पक्ष कमजोर हो गया है और उन्हें विश्वसनीयता के संकट का सामना करना पड़ सकता है।
साथ ही कृषि विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारी किसान संघो के साथ समझौता करने के लिए सरकार के पास अच्छा समय है, दो महीने से जारी किसानों के आंदोलन को समाप्त किया जाए। केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं ।

अहिंसक, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का सम्मान जरूरी यूएन संयुक्त राष्ट्र
भारत में किसानों और पुलिस कर्मियों के बीच हुई हिंसक झड़प के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियों गुतारेस के प्रवक्ता ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का सम्मान करना जरूरी है। यूएन के महासचिव का यह बयान दिल्ली में हुई हिंसा के संबंध में आया। महासचिव गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने नई दिल्ली में हुई हिंसा के सवाल पर कहा कि मुझे लगता है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन, एकत्रित होने की स्वतंत्रता और अहिंसा का सम्मान करना आवश्यक है।
भारतीय खाद्य एवं किसान परिषद् के अध्यक्ष एम.जे. खान ने कहा, एक राष्ट्रीय दिवस पर हुई हिंसा ने दुनिया भर में देश की छवि धूमिल की है। आज, किसान विश्वसनीयता के संकट का सामना कर रहे हैं। इसलिए, समझौता करने के लिए यह सबसे अच्छा समय है। उन्होंने कहा कि करीब 40 प्रदर्शनकारी किसान संघ अपने मजबूत पश्च के साथ सरकार से वार्ता कर रहे थे और सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से ले रही थी। कृषि विशेषज्ञ विजय सरदाना ने दावा किया कि प्रदर्शनकारी किसान संघों का सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन करने में निहित हित छिपा हुआ है ।
कृषि विशेषज्ञ एवं पूर्ववर्ती योजना आयोग के सदस्य रह चुके अभिजीत सेन ने कहा कि अब तक प्रदर्शनकारी किसान संघ एकजुट थे लेकिन मंगलवार की घटना के बाद किसान संगठनों को मिलने वाली सहानभूति अत्यधिक घट गई है।
किसान आंदोलन की दशा व दिशा इस समय सवालों के घेरे में है, जिसके चलते अब ये आंदोलन किस दिशा में जायेगा, ये बड़ा सवाल है और समस्या का समाधान जिसके लिए आंदोलन शुरू हुआ था वो तो कहीं बहुत पीछे छूट गया है, जो नहीं होना चाहिए था।
राजनीतिक रूप से आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश भी कीगयी, खालिस्तान से लेकर आतंकवादी गतिविधियों तक की सम्भावना जताई गयी, जिसका फायदा पड़ोसी मुल्क उठा सकते हैं, ऐसे में आंदोलन का मुद्दा और उसका नतीजा सकारात्मक रहे ये ज़रूरी है, जो की पूरी तरह से दिशा भटक गया है|
ऐसी तमाम ख़बरों के लिए जुड़े रहे करंट न्यूज़ के साथ, हमे बताये कैसा लगा आर्टिकल “Kisan Sangh news- किसान संघो की विश्वसनीयता पर संकट के बादल” लाइक, शेयर, सब्सक्राइब करके |

