कांकेर जिले में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर चलाए गए विशेष अभियान “ऑपरेशन सेफ पैसेज” के तहत विभाग की टीम ने दो आरोपियों को बाघ की दो खाल के साथ गिरफ्तार किया है। बरामद खालों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।

🕵️ मुखबिर की सूचना पर बिछाया गया जाल

वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग तस्करी के लिए पखांजूर की ओर आ रहे हैं। इस आधार पर सोमवार रात करीब 12 बजे पश्चिम बांदे वन परिक्षेत्र के जनकपुर चौक पर घेराबंदी की गई। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम नाम के दो आरोपियों को धर दबोचा। दोनों आरोपी महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के आहेरी थाना क्षेत्र के निवासी हैं।

🎯 इंद्रावती टाइगर रिजर्व में हुआ था शिकार

भानुप्रतापपुर पश्चिम वन मंडल के डीएफओ नवीन कुमार ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया है कि उन्होंने इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में इन बाघों का शिकार किया था। वे खाल को बेचने की फिराक में थे, तभी टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। जब्त की गई खालों को जांच के लिए रायपुर की प्रयोगशाला में भेजा गया है।

🌐 अंतर्राज्यीय तस्करी नेटवर्क पर चोट

यह क्षेत्र गढ़चिरौली, इंद्रावती, अबूझमाड़ और उदंती-सीतानदी को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridor) का हिस्सा है। “ऑपरेशन सेफ पैसेज” के तहत की गई यह संयुक्त कार्रवाई वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो और राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। वन विभाग का कहना है कि वन्यजीवों के संरक्षण के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जा रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में विस्तृत जांच जारी है।

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