बालोद जिले के दुबचेरा गांव के 90 वर्षीय कबीरपंथी संत गुरु सुखदास साहेब के निस्वार्थ सेवा भाव को आखिरकार बड़ी पहचान मिल गई है। अपनी जीवनभर की कमाई और 50 लाख रुपये से अधिक की निजी जमीन दान देकर अस्पताल बनवाने वाले संत साहेब के संघर्ष का सुखद अंत हुआ है। छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस सोसाइटी ने इस भवन में राज्य का पहला ‘रेडक्रॉस संचालित मॉडल अस्पताल’ खोलने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

💰 निजी संपत्ति बेचकर खड़ा किया था सेवा का केंद्र

संत सुखदास साहेब ने किसी सरकारी मदद की बाट जोहे बिना अस्पताल का भव्य भवन तैयार करवाया था। उनका उद्देश्य केवल एक था—इलाके के गरीब मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। इस नेक काम में गांव की पंचायत और ग्रामीणों ने भी पूरा सहयोग दिया था। हालांकि, सरकारी फाइलों के अंबार में यह अस्पताल सालों तक उपेक्षित पड़ा रहा, जिससे संत के मन में एक टीस थी कि क्या उनके जीते-जी यह सपना सच हो पाएगा।

रेडक्रॉस सोसाइटी का बड़ा कदम

छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन तोमन साहू ने दुबचेरा पहुंचकर भवन का निरीक्षण किया और इसे एक आधुनिक अस्पताल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि संत सुखदास साहेब का त्याग प्रेरणादायक है। अब रेडक्रॉस सोसाइटी यहाँ अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराएगी, जिससे आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों मरीजों को अब इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।

🌅 पथराई आंखों में जागी उम्मीद की किरण

बरसों से अपने बनाए अस्पताल को सूना निहारने वाले संत सुखदास साहेब अब बेहद प्रसन्न हैं। इस पहल ने न केवल उनकी सेवा भावना को सम्मान दिया है, बल्कि स्थानीय जनता को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच भी प्रदान किया है। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मीडिया और रेडक्रॉस सोसाइटी का आभार जताते हुए इसे ‘जनसेवा की जीत’ बताया है।

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