आईपीएल के वंडर बॉय यानी वैभव सूर्यवंशी. 15 साल के इस बल्लेबाज को आउट करने के लिए गुजरात टाइटंस को 207 मैचों का तजुर्बा लगाना पड़ा. सवाल है कैसे? देखिए, जिस तरह से वैभव सूर्यवंशी, गुजरात टाइटंस के खिलाफ बल्लेबाजी कर रहे थे, उससे इतना तो तय था कि वो अगर लंबी इनिंग खेल जाते तो फिर मैच का नतीजा (helpless in front of Vaibhav Suryavanshi) जो गुजरात के फेवर में गया वो शायद राजस्थान के हक में हो सकता था. ऐसे में इन दो टीमों के बीच वैभव का विकेट बड़ा फर्क रहा.
वैभव को आउट करने के लिए ‘207 मैचों’ का तजुर्बा लगा
वैभव सूर्यवंशी का विकेट राजस्थान रॉयल्स की इनिंग के तीसरे ओवर में गिरा. वैभव को आउट करने के लिए 207 IPL मैचों का तजुर्बा लगा, जिसमें 88 मैचों का अनुभव मैदान के बाहर से झोंका गया और बाकी के 119 मैचों का तजुर्बा मैदान पर लगा. मैदान के बाहर से आशीष नेहरा थे, जिनके पास 88 IPL मैच खेलने का अनुभव था तो मैदान के अंदर 119 IPL मैचों वाले मोहम्मद सिराज.
बाहर से नेहरा जी का इशारा, मैदान के अंदर सिराज का कमाल
गुजरात टाइटंस के हेड कोच आशीष नेहरा ने मैदान के बाहर से दिमाग लगाने का इशारा किया, जिसके बाद मैदान पर वैभव को गेंदबाजी कर रहे मोहम्मद सिराज ने वही किया. सिराज ने 146.6 kmph की रफ्तार से बाउंसर फेंकी, जिसे वैभव सही से टाइम नहीं कर सके और अरशद खान के हाथों लपके गए.
helpless in front of Vaibhav Suryavanshi – इस तरह 2.5 ओवर में 38 रन के स्कोर पर राजस्थान रॉयल्स को पहला झटका लगा. वैभव सूर्यवंशी 225 की स्ट्राइक रेट से 16 गेंदों पर 36 रन बनाकर आउट हुए, जिसमें 3 छक्के और 3 चौके शामिल रहे.

