वैसे तो Income Tax रिटर्न (ITR) फाइल करते वक्त बहुत सावधानियां बरतनी चाहिए परन्तु ना चाहते हुए भी Mistakes हो ही जाती है| कभी बैंक अकाउंट नंबर गलत डल जाता है, तो कभी ब्याज से हुई आय बताना भूल जाते हैं या गलत डिडक्शन क्लेम कर देते हैं| खैरियत यह है कि मौजूदा आय कर कानून हमें इन गलतियों को सुधारने की अनुमति देता है|
‘अगर Income Tax रिटर्न फाइल करने के बाद कोई Mistakes पकड़ में आए तो आप मौजूदा कर कानूनों के दायरे में गलतियों को सुधार सकते हैं| इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 139(5) टैक्सपेयर्स को रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करके अपनी गलतियां सुधारने की अनुमति देता है|’ यह सेक्शन कहता है कि जिसे गलत रिटर्न भरने का अहसास होता है, वह संबंधित आकलन वर्ष के आखिर तक या आकलन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले, इनमें जो पहले हो, उस अवधि में रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकता है|
ध्यान रहे कि आकलन वर्ष यानी असेसमेंट वाले साल में उस वित्त वर्ष का ठीक अगला वित्त वर्ष होता है जिस वित्त वर्ष का आईटीआर हम फाइल करते हैं| यानी, अगर हम 2017-18 का रिटर्न फाइल कर रहे हैं तो इसका आकलन वर्ष 2018-19 होगा|
Income Tax Mistakes – रिटर्न फाइल करते वक़्त जो सामान्य मिस्टेक्स होती है :-
बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज को जरूर दिखाएं :-
इनकम टैक्स रिटर्न भरते वक्त बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज को जरूर दिखाएं| अगर आप अपनी इस आय को नहीं दिखाते हैं, तो इसे टैक्स चोरी के तौर पर देखा जाएगा और आपके खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है जबकि अगर आप इस ब्याज को अपनी ITR में दिखाते हैं तो इनकम टैक्स के सेक्शन 80TTA के द्वारा आप इस ब्याज पर 10000 तक की छूट का लाभ उठा सकते हैं|
गलत ITR फॉर्म न भरें :-
आयकर विभाग ने कई आईटीआर फॉर्म निर्धारित किए हैं| आपको अपने टैक्स को दर्ज करने के लिए सावधानी से अपना आईटीआर चुनना होगा| अन्यथा, टैक्स विभाग इसे अस्वीकार कर देगा और आपको रिवाइज रिटर्न दाखिल करने के लिए कहा जाएगा|
अगर आपने अपनी इनकम या सेविंग्स गलत दर्ज कर दी है तो परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि आप रिवाइज रिटर्न दाखिल करके रिटर्न को सही कर सकते हैं| इसलिए अगर आपके द्वारा दायर रिटर्न में कोई गलती मिलती है तो आपको कोई कार्रवाई करने से पहले टैक्स विभाग से नोटिस का इंतजार नहीं करना चाहिए| इसके बजाए आपको तुरंत रिवाइज रिटर्न फाइल करनी चाहिए|
Income Tax Mistakes – पिछली कंपनी से हुई वेतन की आय का ब्यौरा दें :-
आयकर रिटर्न भरते वक्त ध्यान रखें कि यदि आप वित्त वर्ष के दौरान नौकरी छोड़ कर दूसरी नौकरी में शामिल हुए हैं तो रिटर्न भरते वक्त दोनों कंपनियों से हुई आय का विवरण अपनी ITR में करें वरना आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है| ऐसे में ज़रूरी है की आप अपनी पिछली और वर्तमान दोनों ही कंपनियों के नियोक्ता से फॉर्म 16 अवश्य लें| फॉर्म 16 सुनिश्चित करता है कि आपके रिटर्न में कम से कम समय लगे और उसमें कम से कम गलतियां हों|
फॉर्म 26AS अवश्य डाउनलोड करें और अपनी आय का उससे मिलान करें :-
टैक्स क्रेडिट या फॉर्म 26AS स्टेटमेंट आपकी आय पर काटे गए TDS के भुगतान की सभी जानकारी दे देता है अपना टैक्स रिफंड क्लेम करने से पहले इसे जरूर जांच लें| यह टैक्स कैलकुलेशन में किसी भी तरह की गलती से आपको बचाएगा जिससे आप एक सही टैक्स रिटर्न फाइल कर पाएंगे|
फॉर्म 26AS के मिसमैच होने पर लापरवाही ना बरतें :-
Income tax mistakes हर करदाता का यह कर्त्तव्य है की वह अपने फॉर्म 16/16A को फॉर्म 26AS से मिला ले| यदि फॉर्म 16/16A में आ रही आय और फॉर्म 26AS में आ रही आय में कोई अंतर है तो आप आयकर विभाग से इस बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं अथवा अपने नियोक्ता या TDS काटने वाले व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं| इस तरह के अंतर की बहुत सी वजहें हो सकती हैं|
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अगर टैक्स काटने वाले ने TDS रिटर्न फाइल नहीं किया, या काटा गया TDS इनकम टैक्स विभाग के पास जमा नहीं कराया तो फॉर्म 26AS अधूरे आंकड़े देगा| इसके साथ ही गलत कर निर्धारण वर्ष लिखने, परमानेंट अकाउंट नंबर सही नहीं होने या चालान की डीटेल गलत लिखने की वजह से भी फॉर्म 26AS में मिसमैच हो सकता है| इस तरह की गलती को आयकर विभाग आमदनी या टैक्स देनदारी कम/अधिक दिखाने के प्रयास के रूप में ले सकता है| इस तरह की गलती की वजह से आयकर विभाग आपके खिलाफ जांच कर सकता है या नोटिस भेज सकता है|
कैपिटल गेन्स के लॉस को न छुपाएं :-
रिटर्न फाइल करने का मतलब यह नहीं है कि आपको सिर्फ अपनी कमाई का ब्यौरा देना है| अक्सर कैपिटल गेन्स से हमें लॉस भी होता है जिसे हम ITR में नहीं दिखाते हैं| ऐसा करना गलत हैं क्योंकि किसी साल में अर्जित लॉस को अपनी रिटर्न में शामिल करके अपनी टैक्सेबल इनकम को कम कर सकते हैं| साथ ही इस लॉस को आने वाले सालों के लिए आप कैरी फॉर्वर्ड भी कर सकते हैं|
गलत व्यक्तिगत जानकरी न दें :-
अपनी सभी जानकारियों को सही-सही ITR फॉर्म में भरें| ध्यान रहे कि आपके नाम की स्पेलिंग, पूरा पता, ईमेल, कॉन्टेक्ट नंबर जैसी जानकारी आपके पैन, ITR और आधार में एक जैसी हो| वही मोबाइल नंबर डालें जिस पर SMS आ सके| गलत जानकारी देने पर आपको रिफंड मिलने में मुश्किल होगी| विभाग से बचने के लिए गलत जानकारी देना महंगा पड़ सकता है|
टैक्स रिटर्न को वेरीफाई करें :-
पहली बार टैक्स फाइल करने वाले लोग यह गलती बहुत अधिक करते हैं| वह सोचते हैं कि उनके द्वारा टैक्स रिटर्न भरने के बाद उनका काम खत्म हो गया है जबकि रेगुलर करदाता जानते हैं कि आपको टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद उसे वेरिफाई भी करना होता हैं| आप अपने इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल से अपने टैक्स रिटर्न को ई-वेरिफाई कर सकते हैं या सीपीसी-बेंगलुरू भेज कर भी उसे वेरिफाई करवा सकते हैं|
इनकम टैक्स रिटर्न भरने में देर करना :-
यह भी एक बड़ी आम गलती है जिसे लोग अक्सर कर देते हैं| इस बार अगर आप 31 जुलाई से चूके तो आप पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है| अगर आप 31 दिसंबर तक भी ITR नहीं फाइल कर पाए तो यह जुर्माना 10,000 रुपये तक हो सकता है| देर से ITR दाखिल करने पर आप टैक्स रिफंड पर फाइल कर ब्याज भी प्राप्त नहीं कर पाएंगे|
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आशा करते है आज का आर्टिक्ल आपको (ITR) Income Tax रिटर्न फाइल करते वक़्त होने वाली Mistakes से बचाएगा और कई नईचीज़ो से भी अवगत करवाएगा|
Image Source : taxationhelper.blogspot.com

