यमन में हूती विद्रोहियों ने ईरान के साथ अपने मजबूत संबंधों को फिर से दिखाया है. यह समूह ईरान से सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक मदद लेता है. हूतियों ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी, तो वे सीधे मिडिल ईस्ट के युद्ध में शामिल होंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई नई ताकतें अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर (Houthi Entry in Iran Conflict) ईरान या उसके सहयोगियों पर हमला करती हैं, या रेड सी का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किया जाता है, तो वे सक्रिय रूप से युद्ध में उतरेंगे.

इजराइल की सेना ने बताया कि यमन से एक मिसाइल दागी गई, जिससे बीएर्सशेबा शहर और आसपास के इलाकों में अलार्म बजा. हूतियों की यह दखल अब अरब प्रायद्वीप में युद्ध का नया मोर्चा खोल सकती है. सबसे बड़ी चिंता रेड सी में जहाजों पर हमलों का खतरा है, क्योंकि हूती पहले भी समुद्री मार्गों पर हमले कर चुके हैं. 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ब्रिटेन के साथ मिलकर हूतियों के हमलों को रोकने के लिए बमबारी अभियान चलाया था.

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हूती आंदोलन, जिसे पहले अंसार अल्लाह (ईश्वर के समर्थक) कहा जाता था, यमन के शिया मुसलमानों (जैदी समुदाय) का प्रतिनिधित्व करता है. यह एक राजनीतिक और धार्मिक समूह है. जो ईरान के नेतृत्व वाले एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस का हिस्सा है. हूती इजराइल, अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ खड़े हैं. इस समूह के सहयोगी हमास और लेबनान का हिज्बुल्लाह भी है.

Houthi Entry in Iran Conflict – हूती आंदोलन की शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी. इसका नाम इसके संस्थापक हुसैन अल-हूती के नाम पर रखा गया. फिलहाल इसका नेतृत्व उनके भाई अब्दुल मलिक अल-हूती कर रहे हैं. हूतियों का युद्ध में शामिल होना मिडिल ईस्ट के तनाव को और बढ़ा सकता है. इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री रास्तों पर खतरा पैदा कर सकता है.

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