चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने सभी उपायुक्तों, SDM और जिला प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की है कि वे ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007’ के प्रावधानों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील रहें और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों को पूरी प्रतिबद्धता और मानवीय (Haryana Govt Decision) दृष्टिकोण के साथ हल करें।
मुख्य सचिव आज यहाँ ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007’ और ‘हरियाणा माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण नियम, 2009’ पर आयोजित राज्य-स्तरीय कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे थे। सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण और अंत्योदय (सेवाएं) विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में राज्य भर से उपायुक्तों, उप-मंडल अधिकारियों (SDM), कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़े कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इसे भी पढ़ें – Haryana Elections : “वोट दो, शादी करवाऊंगी!” हरियाणा की BJP MLA का कुंवारों से अनोखा वादा
श्री रस्तोगी ने कहा कि पुरानी पीढ़ी ने एक ऐसा दौर देखा है जब कई पीढ़ियां संयुक्त परिवार प्रणाली में एक साथ रहती थीं और बुजुर्गों की देखभाल करना परिवार की एक स्वाभाविक जिम्मेदारी मानी जाती थी। लेकिन बदलते सामाजिक ताने-बाने और संयुक्त परिवारों के बजाय एकल परिवारों की बढ़ती संख्या के कारण, अब कई बुजुर्ग माता-पिता या तो केवल एक संतान पर निर्भर हैं या अकेले रह रहे हैं। ऐसी स्थिति में, उनके कल्याण के लिए संस्थागत सुरक्षा और निरंतर निगरानी की आवश्यकता बढ़ गई है।
Haryana Govt Decision – श्री रस्तोगी ने कहा कि ये कानून न केवल बुजुर्ग माता-पिता को वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने का एक कानूनी माध्यम हैं, बल्कि ये वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान, गरिमा, स्वास्थ्य सेवाएं, आश्रय और भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करने की एक सामाजिक और नैतिक प्रतिबद्धता भी हैं।


