Hooda said What is the problem of the government with the judicial inquiry of Nuh violence

प्रेस वार्ता करते पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा।
– (फाइल फोटो)


हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि नूंह हिंसा मामले में सरकार न्यायिक जांच से भाग रही है। न्यायिक जांच से ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा। जांच से ही पता लगेगा कि साजिश करने वाला कौन है, लेकिन सरकार को पता नहीं जांच से क्या तकलीफ है। इसका मतलब है कि दाल में कुछ जरूर काला है, जिसे सरकार छिपाने का प्रयास कर रही है।

हुड्डा बुधवार को यहां अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। सरकार द्वारा नूंह हिंसा में कांग्रेस विधायक मामन खान का नाम लिए जाने के सवाल पर हुड्डा ने कहा कि सरकार अपनी विफलता छुपाने के लिए दूसरों पर आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस का शुरू से ही एक स्टैंड है, इस मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए। इस मसले पर चर्चा के लिए विपक्ष द्वारा दिए गए प्रस्ताव को भी कोर्ट का हवाला देकर खारिज कर दिया गया।

मामन खान से नहीं हुई बात

विधायक मामन खान से बात के सवाल पर हुड्डा ने कहा कि उनकी मामन खान से कोई बात नहीं हुई है। सरकार की तरह क्या कांग्रेस भी नूंह हिंसा को साजिश मानती है, के सवाल पर हुड्डा ने कहा कि यह शरारती तत्वों का काम है। नूंह हिंसा मामले में किसी को भी लाभ नहीं होगा, यह शरारती लोगों का काम है और इससे पूरे हरियाणा को नुकसान होगा। क्योंकि पास में गुरुग्राम में आने वाली कंपनियां इससे बचेंगी और प्रदेश में निवेश कम होगा।

जनता की अदालत में जाएगी कांग्रेस

पीपीपी काे लागू करने के सरकार के फैसले के सवाल पर हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में जनता की अदालत में जाएगी। साथ ही कांग्रेस की सरकार बनने पर पीपीपी, प्राॅपर्टी आईडी समेत उन गैर जरूरी प्रोजेक्ट को बंद किया जाएगा, जिससे आम व्यक्ति को दिक्कतें आ रही हैं। केंद्र सरकार द्वारा गैस सिलेंडर पर 200 रुपये की छूट देने के सवाल पर हुड्डा ने कहा कि ये बड़ी लूट और छोटी छूट है।

अनुसूचित जाति के लिए प्रमोशन में आरक्षण गुमराह करने की कोशिश

हुड्डा ने कहा कि सरकार ने विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए प्रमोशन में आरक्षण के नाम पर भी गुमराह किया। सच्चाई यह है कि एससी समाज को इस आरक्षण से कोई लाभ नहीं होगा। क्योंकि सरकार ने 17 अगस्त को ही एक लेटर जारी करके इस आरक्षण के असर को शून्य कर दिया था। इसमें जानबूझकर ऐसी शर्तें रखी गई हैं कि इससे किसी को कोई लाभ ना हो।

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