ग्वालियर के सिरोल थाना क्षेत्र से 24 मई को लापता हुई 13 वर्षीय छात्रा का मामला बेहद सनसनीखेज निकला है। जिस पिता ने बच्ची के खुदकुशी करने की कहानी सुनाई थी, वही उसकी हत्या का मुख्य आरोपी निकला। आरोपी ने न केवल बच्ची की जान ली, बल्कि सबूत मिटाने के लिए शव को भिंड जिले के मौ क्षेत्र स्थित सिंध नदी में फेंक दिया, ताकि मगरमच्छ उसे नष्ट कर दें।
🕵️ क्या था पूरा घटनाक्रम?
पुलिस पूछताछ और फॉरेंसिक जांच में सामने आया कि 24 मई की रात छात्रा पढ़ाई कर रही थी। घर के अन्य सदस्यों के सोने के बाद, किसी विवाद पर सौतेले पिता ने गुस्से में उसका गला घोंट दिया। हत्या के बाद आरोपी ने इसे आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को साड़ी के फंदे से लटका दिया। बाद में उसने मोबाइल को फ्लाइट मोड पर डाला और शव को ठिकाने लगाने के लिए नदी तक ले गया।
🔬 वैज्ञानिक साक्ष्यों ने खोला राज
शुरुआत से ही पुलिस को पिता की कहानी पर संदेह था। फॉरेंसिक टीम ने जब घटनास्थल की जांच की, तो वहां मिले साक्ष्य और आरोपी के बयानों में काफी विरोधाभास पाया गया। पुलिस ने जब पिता और मां से अलग-अलग सख्ती से पूछताछ की और तकनीक के जरिए साक्ष्य सामने रखे, तो आरोपी अपना जुर्म स्वीकार करने के लिए मजबूर हो गया। उसकी निशानदेही पर 29 मई को नदी किनारे से एक क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ।
🧬 अब डीएनए टेस्ट से होगी पहचान
चूंकि बरामद शव को नदी में मौजूद जलीय जीवों और मगरमच्छों ने बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था, इसलिए उसकी पहचान सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है। फिलहाल, पुलिस ने कानूनन पुष्टि के लिए शव का डीएनए टेस्ट कराने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो पाएगा कि नदी से मिला शव लापता छात्रा का ही है या नहीं। आरोपी से मामले की विस्तृत पूछताछ जारी है ताकि हत्या की ठोस वजह और अन्य पहलुओं की गहन जांच की जा सके।
संपादकीय टिप्पणी: यह घटना समाज में रिश्तों के प्रति अविश्वास और घोर पतन का उदाहरण है। क्या आपको लगता है कि इस तरह के अपराधों में फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए अपराधियों को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।


