जमशेदपुर (झारखंड): पूर्वी सिंहभूम जिले के औद्योगिक नगर जमशेदपुर में राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस के अवसर पर एक भव्य गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार सम्मिलित हुए। इस अवसर पर जनसमूह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हस्तकरघा भारत की अनमोल विरासत है और इससे बड़ा स्वदेशी का कोई अन्य माध्यम नहीं हो सकता। आज इस प्राचीन कला को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की महती आवश्यकता है। जमशेदपुर में ‘वीवर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन’ द्वारा बिस्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में इस 13वें हस्तकरघा दिवस समारोह का आयोजन किया गया।
🧵 लुप्त हो रही बुनकर विद्या को सहेजने पर जोर, बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार से पहुंचे प्रतिनिधि
उल्लेखनीय है कि देश में वर्ष 2014 से निरंतर राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस का आयोजन किया जा रहा है।
जमशेदपुर में आयोजित इस अंतरराज्यीय कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र तथा बिहार राज्यों से भी प्रतिनिधि एवं बुनकर सम्मिलित हुए। सम्मेलन के दौरान इस गंभीर विषय पर गहन मंथन हुआ कि वर्तमान दौर में पारंपरिक बुनकर विद्या धीरे-धीरे लुप्तप्राय हो रही है, जिसे बचाने और संवारने की सख्त जरूरत है; जबकि झारखंड राज्य में बुनकरों को लूम (Loom) उपलब्ध कराने की पूरी बुनियादी व्यवस्था विद्यमान है।
🎖️ उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों को मिला सम्मान, स्वतंत्रता संग्राम में खादी-चरखा की भूमिका को किया याद
समारोह के दौरान अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं कलात्मक योगदान देने वाले अनेक बुनकरों को राज्यपाल द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस उन लाखों बुनकरों के कठिन परिश्रम, अप्रतिम कौशल एवं सृजनशीलता को राष्ट्रीय स्तर पर नमन करने का अवसर है। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौर में चरखा, खादी और हस्तकरघा केवल वस्त्र निर्माण के साधन मात्र नहीं थे, बल्कि वे स्वदेशी, आत्मनिर्भरता तथा राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रतीक बन गए थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खादी को जन-आंदोलन का रूप देकर देशवासियों में आत्मगौरव की भावना का संचार किया था।
💼 “झारखंड के तसर रेशम को मिले अंतरराष्ट्रीय बाजार”: वोकल फॉर लोकल व पीएम विश्वकर्मा योजना का उल्लेख
राज्यपाल ने रेखांकित किया कि झारखंड की जनजातीय एवं ग्रामीण परंपराओं में हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प की अत्यंत समृद्ध विरासत विद्यमान है।
विशेष रूप से राज्य का ‘तसर सिल्क’ अपनी अद्वितीय गुणवत्ता के लिए देश भर में विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक डिजिटल तकनीक, नए डिजाइन, नवाचार और प्रभावी विपणन (Marketing) के माध्यम से बुनकरों के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना समय की मुख्य मांग है। उन्होंने याद दिलाया कि उनके केंद्रीय मंत्री रहते राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस मनाने की ऐतिहासिक पहल शुरू हुई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्रयास पारंपरिक कारीगरों को सशक्त बनाकर ‘विकसित भारत’ की आर्थिक रीढ़ बन सकते हैं।


