वाराणसी (उत्तर प्रदेश): पहाड़ी राज्यों में हो रही मूसलाधार बारिश और सहायक नदियों के उफान का सीधा असर अब धर्मनगरी काशी में गंगा नदी पर साफ दिखाई देने लगा है।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर अत्यंत तीव्र गति से बढ़ रहा है। बुधवार दोपहर दो बजे तक गंगा का जलस्तर 67.4 मीटर दर्ज किया गया, जो कि चेतावनी बिंदु (71.2 मीटर) की ओर तेजी से अग्रसर है। जलस्तर में इस अप्रत्याशित वृद्धि से तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
🛕 घाटों का आपसी संपर्क टूटा, मणिकर्णिका व हरिश्चंद्र घाट के निचले हिस्से डूबे
गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण बनारस के प्रसिद्ध 84 पक्के घाटों का आपसी संपर्क पूरी तरह से टूट गया है:
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छतों पर शवदाह: मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के सभी निचले प्लेटफॉर्म (शवदाह स्थल) गंगा की लहरों में समा चुके हैं, जिसके कारण अब गलियों और छतों पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
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रास्ते अवरुद्ध: मणिकर्णिका घाट से अन्य घाटों को जोड़ने वाले सभी संपर्क मार्ग जलमग्न होकर बंद हो चुके हैं।
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मंदिर डूबे: बाबा मसाननाथ का आधा मंदिर गंगा के पानी में डूब चुका है। इसके साथ ही सिंधिया घाट स्थित प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर और दत्तात्रेय चरण पादुका मंदिर अखाड़ा भी जलमग्न हो गए हैं।
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गीली लकड़ियों की समस्या: गंगा का पानी ऊपर तक आ जाने से किनारे रखी लकड़ियां भीग गई हैं, जिसके चलते शवों के दाह-संस्कार में लगने वाला समय काफी बढ़ गया है।
⏳ छतों पर लगी शवों की लंबी कतारें, 4-4 घंटे करना पड़ रहा है इंतजार
मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है:
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लंबा इंतजार: गाजीपुर से दाह-संस्कार के लिए पहुंचे परिजनों ने बताया कि सीमित जगह होने के कारण उन्हें अंतिम संस्कार के लिए चार-चार घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
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भीड़ और जगह की कमी: स्थानीय लकड़ी व्यापारियों के अनुसार, छतों पर सीमित जगह है, जहां परिजनों के अलावा देखने और फोटो खींचने वालों की अनावश्यक भीड़ एकत्र होने से अव्यवस्था बढ़ रही है।
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दैनिक दाह-संस्कार प्रभावित: तीर्थ पुरोहितों के अनुसार मणिकर्णिका घाट पर रोजाना 150 से 200 शवदाह होते हैं, लेकिन जलमग्न स्थिति के चलते परिजनों और पुरोहितों को विकट चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है।
🚤 नौका संचालन पर रोक, NDRF और जल पुलिस अलर्ट मोड पर तैनात
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस तंत्र पूरी तरह सतर्क हो गया है:
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नावों पर पाबंदी: श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए गंगा में सभी प्रकार की छोटी-बड़ी नावों और क्रूज के संचालन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है।
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सुरक्षा बलों की तैनाती: किसी भी संभावित आपात स्थिति और राहत कार्य के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और जल पुलिस के जवानों को प्रमुख घाटों पर मोटरबोट के साथ तैनात किया गया है।
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श्रद्धालुओं से अपील: प्रशासन ने आम नागरिकों, स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे उफनती गंगा के समीप न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर बने रहें।


