नई दिल्ली: पिछले 10 दिनों में शेयर बाजार में आई तेजी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के सकारात्मक रुख के बावजूद, भारतीय रुपया दबाव में है। डॉलर के मुकाबले रुपया 94.86 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। हालांकि कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में 23% से अधिक की गिरावट ने रुपये को बड़े नुकसान से बचाया है, लेकिन डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने स्थानीय मुद्रा के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
💵 रुपये में गिरावट का कारण
बुधवार के शुरुआती कारोबार में रुपया 10 पैसे फिसलकर 94.86 पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रूड ऑयल की कीमतों में राहत न होती, तो रुपया पहले ही 96-97 के स्तर को छू चुका होता। बाजार में इंपोर्टर्स की मांग और डॉलर की खरीदारी, एक्सपोर्टर्स की सप्लाई से अधिक बनी हुई है, जो रुपये पर दबाव बनाए हुए है।
🔮 क्या 96 के लेवल पर जा सकता है रुपया?
चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी एनालिस्ट कावेरी मोरे के अनुसार, यदि डॉलर 95 के स्तर को पार करता है, तो रुपया 95.50 से 96.00 के स्तर तक गिर सकता है। इसका तात्कालिक सपोर्ट 94.00-94.10 के आसपास है। रुपये की आगे की दिशा पूरी तरह से डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतों और FII के निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी। फिलहाल, बाजार का रुख सतर्क बना हुआ है।
📊 बाजार का ओवरऑल सेंटीमेंट
भले ही करेंसी बाजार में कमजोरी हो, लेकिन घरेलू इक्विटी बाजार में उत्साह है:
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सेंसेक्स: 187.63 अंक चढ़कर 76,388.31 पर बंद हुआ।
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निफ्टी: 57.75 अंक की बढ़त के साथ 23,878.85 पर पहुंचा।
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FII निवेश: विदेशी निवेशकों ने मंगलवार को नेट आधार पर 17.86 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।


