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    Home » कांवड़ यात्रा के कठोर नियम: गलती से भी न रखें जमीन पर, जानें पहनावे और खान-पान से जुड़ी सावधानियां

    कांवड़ यात्रा के कठोर नियम: गलती से भी न रखें जमीन पर, जानें पहनावे और खान-पान से जुड़ी सावधानियां

    August 7, 2026 धार्मिक 2 Mins Read
    strict rules of Kanwar Yatra
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    हरिद्वार/काशी : पवित्र सावन महीने की पावन शुरुआत हो चुकी है। इस संपूर्ण पुण्य माह में देश भर से लाखों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने हेतु श्रद्धापूर्वक कांवड़ यात्रा निकालते हैं। प्रथम बार कांवड़ यात्रा करने वाले शिवभक्तों के लिए संकल्प, पवित्रता और कड़े नियमों का निष्ठापूर्वक अनुपालन सर्वोपरि माना गया है। यदि (strict rules of Kanwar Yatra) आप भी इस वर्ष पहली बार कांवड़ ला रहे हैं, तो यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व महत्वपूर्ण बातों का ज्ञान होना आवश्यक है।

    strict rules of Kanwar Yatra – कांवड़ यात्रा केवल एक साधारण पैदल पदयात्रा नहीं है, अपितु यह देवाधिदेव महादेव के प्रति पूर्ण निष्ठा, अगाध श्रद्धा और कठिन नियमों के साधना की प्रतीक है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, इन नियमों का कड़ाई से पालन करने पर ही भोलेनाथ अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं।

     कांवड़ को सीधे भूमि पर न रखने का विशेष विधान 

    कांवड़ यात्रा का सबसे सर्वप्रमुख और कठोरतम नियम यह है कि पवित्र जल से भरी कांवड़ को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता।यात्रा के दौरान मार्ग में विश्राम अथवा अल्पविराम लेते समय कांवड़ को सदैव लकड़ी के स्टैंड, वृक्ष की शाखा अथवा किसी स्वच्छ ऊंचे स्थान पर ही स्थापित किया जाता है। यदि भूलवश या अज्ञानता से भी कांवड़ भूमि को स्पर्श कर लेती है, तो यात्रा का संकल्प भंग माना जाता है और पुनः पवित्र जल भरना पड़ता है। अ

     चमड़े की वस्तुएं पूर्णतः वर्जित, सात्विक आहार अनिवार्य

    कांवड़ यात्रा की समयावधि में अपने पहनावे, वेशभूषा तथा खान-पान पर पूर्ण नियंत्रण रखना अनिवार्य होता है। यात्रा के दौरान चमड़े से निर्मित बेल्ट, पर्स, जूते या चप्पल का प्रयोग पूर्णतः वर्जित एवं निषेध है। इसके अतिरिक्त, यात्रा पूर्ण होने तक पूर्ण ब्रह्मचर्य व्रत का पालन, लहसुन-प्याज रहित सात्विक आहार ग्रहण करना तथा अपनी वाणी पर संयम रखना आवश्यक है।

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