भक्ति और साधना का पावन सावन महीना चल रहा है। शास्त्रानुसार मनचाहा और योग्य जीवनसाथी प्राप्त करने के लिए सावन के महीने में मंगला गौरी और भगवान शिव की आराधना का (correct rules of shiva puja) विशेष विधान है।
correct rules of shiva puja – इस दौरान कुंवारी कन्याएं व्रत रखकर विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं ताकि उन्हें सुयोग्य वर मिल सके। हालांकि, कई बार जानकारी के अभाव या अनजाने में पूजा के दौरान कुछ गलतियां हो जाती हैं, जिससे व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता।
कन्याओं को शिव पूजा के दौरान मुख्य रूप से 4 गलतियों से बचना चाहिए। यदि शास्त्रों में बताए गए सही नियमों का ध्यान रखकर पूजा की जाए, तो माता पार्वती और महादेव प्रसन्न होकर मनचाहा वर प्रदान करते हैं। इसलिए पूजा करते समय इन सूक्ष्म नियमों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
हल्दी, सिंदूर, केतकी और तुलसी के प्रयोग से बचें
शिव पूजन के दौरान पूजन सामग्री का सही चयन होना बहुत आवश्यक है। सबसे पहली बात कि हल्दी और सिंदूर को कभी भी सीधे शिवलिंग पर अर्पित न करें। हल्दी और सिंदूर स्त्री तत्व से संबंधित माने गए हैं, इसलिए इन्हें केवल माता पार्वती यानी गौरी पीठ पर ही अर्पित करना चाहिए, जलधारी या शिवलिंग पर नहीं। इसके अतिरिक्त केतकी के फूल और तुलसी पत्र का प्रयोग भी भगवान शिव की पूजा में पूरी तरह वर्जित (निषेध) माना गया है।


