धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले के सरायढेला थाना क्षेत्र स्थित एक निजी नर्सिंग होम में इलाज के दौरान 22 वर्षीय एक年輕 महिला की मौत हो जाने का बेहद दुखद मामला सामने आया है। मृतका की पहचान जिले के ही लोयाबाद इलाके की रहने वाली मोनी परवीन के रूप में हुई है। महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन तथा संबंधित चिकित्सक पर इलाज के दौरान भारी लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। इस आकस्मिक मौत के बाद अस्पताल परिसर के भीतर गंभीर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को भी बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा।
पथरी के ऑपरेशन के बाद स्टेंट निकलवाने अस्पताल पहुंची थी मृतका
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका मोनी परवीन का करीब डेढ़ महीने पहले इसी निजी नर्सिंग होम में पथरी (किडनी स्टोन) का ऑपरेशन किया गया था। उस ऑपरेशन के दौरान उनके शरीर के भीतर एक मेडिकल स्टेंट डाला गया था। मंगलवार को उसी स्टेंट को बाहर निकलवाने के लिए अस्पताल की तरफ से उन्हें बुलाया गया था। परिजनों का आरोप है कि जैसे ही वे अस्पताल पहुंचे, तो उन पर पहले पैसे जमा करने का भारी दबाव बनाया जाने लगा। इसके बाद महिला को ऑपरेशन थिएटर के अंदर ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान ही उनकी अचानक मौत हो गई।
परिजनों का फूटा गुस्सा, अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था पर उठाए सवाल
अस्पताल के अंदर महिला की मौत की दुखद सूचना मिलते ही वहां मौजूद सभी परिजन और रिश्तेदार पूरी तरह आक्रोशित हो उठे। उन्होंने अस्पताल के प्रशासनिक प्रबंधन पर सीधे तौर पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने इलाज की पूरी प्रक्रिया और वहां की व्यवस्थाओं पर कई बड़े सवाल खड़े किए। उनका यह भी कहना था कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और मृतका के छोटे-छोटे मासूम बच्चे हैं, जिनकी परवरिश और भविष्य पर अब बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
मेयर संजीव सिंह के दखल के बाद देर रात तक चली लंबी वार्ता
इस पूरे मामले की गंभीर जानकारी मिलते ही धनबाद के मेयर संजीव सिंह फौरन अस्पताल पहुंचे। उन्होंने वहां दुखी परिजनों से अकेले में बातचीत की और पूरी घटना की जानकारी ली, जिसके बाद उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के साथ बैठकर वार्ता का दौर शुरू किया। महिला की मौत के बाद अस्पताल में बने तनावपूर्ण माहौल को शांत कराने के लिए मेयर संजीव सिंह और प्रबंधन के बीच देर रात तक बातचीत चलती रही। इस दौरान चर्चा में विशेष रूप से परिजनों की कमजोर आर्थिक स्थिति और मृतका के छोटे बच्चों के भविष्य के भरण-पोषण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
सात लाख रुपये की आर्थिक सहायता पर बनी आपसी सहमति
अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच चली इस लंबी और मैराथन बातचीत के बाद अंततः यह तय हुआ कि अस्पताल की ओर से मृतका के शोक संतप्त परिजनों को 7 लाख रुपये की सहयोग राशि प्रदान की जाएगी, जिस पर दोनों पक्षों की सहमति बन गई। इसके पश्चात परिजनों को यह आर्थिक सहायता दे दी गई। इस मौके पर मेयर संजीव सिंह ने कहा कि यह पीड़ित परिवार के लिए बेहद असहनीय और दुखद समय है। ऐसे कठिन दौर में परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव सहयोग दिलाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला सीधे तौर पर चिकित्सकीय पहलुओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए मेडिकल कारणों पर अभी कोई सीधी टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, फिर भी परिजनों द्वारा उठाए गए तमाम बिंदुओं पर अस्पताल प्रबंधन को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
मौत के असल कारणों को लेकर उठे सवाल, जांच का इंतजार
महिला की अचानक हुई इस मौत के बाद परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही के तमाम आरोपों ने पूरे इलाज की प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मोनी परवीन की मौत का वास्तविक और सटीक कारण क्या था तथा इलाज के दौरान किसी प्रकार की चिकित्सीय चूक हुई थी या नहीं, इन सभी बातों का खुलासा पूरी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। देर रात चली वार्ता के बाद भले ही 7 लाख रुपये की सहायता राशि पर समझौता हो गया हो, लेकिन इस घटना से जुड़े मेडिकल और तकनीकी सवालों के जवाब मिलने अभी भी बाकी हैं।


