दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में लगी आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। गुरुग्राम के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) विवेक अग्रवाल के आखिरी शब्द—”भाई, शायद हम अब बच नहीं पाएंगे, चारों तरफ बस काला धुआं है”—उनकी तड़प और लाचारी को बयां करते हैं। विवेक अपने पिता के इलाज के (21 people died tragically in hotel fire) लिए सपरिवार दिल्ली आए थे, लेकिन यह होटल उनके लिए काल बन गया। इस भीषण अग्निकांड में विवेक, उनकी पत्नी, मां और दो बेटियों समेत एक ही परिवार के 8 लोग और कुल 21 मासूम अपनी जान गंवा बैठे।
21 people died tragically in hotel fire – जांच में इस हादसे के पीछे होटल प्रशासन की घोर लापरवाही और लालच उजागर हुआ है। इमारत को मात्र 6 कमरों की अनुमति थी, लेकिन मालिक ने पांच मंजिलों पर अवैध रूप से 25 से अधिक कमरे बना रखे थे। सेंसर वाला मुख्य गेट बिजली कटते ही जाम हो गया और सील खिड़कियों ने वेंटिलेशन का रास्ता बंद कर दिया। न तो यहां फायर एनओसी (NOC) थी और न ही स्मोक डिटेक्टर।
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पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है, जिस पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। अपनी गिरफ्तारी के बाद लवकेश का बयान संवेदनहीनता की पराकाष्ठा था। उसने कहा, “मैं खुद काम नहीं देखता था। दिल्ली में यह सब मॉडिफिकेशन नॉर्मल है, यहां सब चलता है।”
फरिश्ते बने स्थानीय लोग: गद्दे बिछाकर बचाई कई जानें
इस खौफनाक मंजर के बीच स्थानीय लोगों ने मानवता की मिसाल पेश की। होटल के सामने गद्दे-कंबल की दुकान चलाने वाले अरमान ने बिना देरी किए अपनी दुकान के सारे नए गद्दे सड़क पर बिछा दिए, ताकि ऊपर से कूदने वालों की जान बच सके। अफजल, शाहरुख, अनीस, आमिर और वसीम जैसे स्थानीय युवकों ने खिड़कियों की ग्रिल तोड़कर 58 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।


