मुंबई : मुंबई के उपनगरीय इलाके कुर्ला (साकीनाका) में दो दिन पूर्व हुए भीषण लैंडस्लाइड (भूस्खलन) हादसे के बाद एक अत्यंत चौंकाने वाली प्रशासनिक रिपोर्ट उजागर हुई है, जिससे स्पष्ट हुआ है कि इस त्रासदी को लेकर वर्षों पूर्व ही सचेत कर दिया गया था। इस दुखद हादसे में जान गंवाने वालों की कुल संख्या अब बढ़कर 8 हो गई है। सरकारी दस्तावेजों और अभिलेखों से यह प्रमाणित हुआ है कि देश की नोडल एजेंसी ‘जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ (GSI) ने करीब (Kurla landslide) आठ वर्ष पूर्व ही बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) को स्पष्ट अलर्ट जारी कर दिया था कि कुर्ला की पहाड़ी का यह हिस्सा किसी भी समय ढह सकता है।

Kurla landslide – अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा प्रकाशित एक खोजी रिपोर्ट में आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए उल्लेख किया गया है कि GSI ने साकीनाका स्थित ‘हिल नंबर 3’ पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का कड़ा सुझाव दिया था। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 से 2008 के मध्य भी इसी पहाड़ी पर तीन बार भूस्खलन की गंभीर घटनाएं घटित हुई थीं, जिनमें 16 मासूम नागरिकों की अकाल मृत्यु हो गई थी और कम से कम 26 मकान पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए थे।

 2 साल के फील्ड सर्वे के बाद 2018 में बनी थी 435 पन्नों की रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट

भूस्खलन के वैज्ञानिक अध्ययन हेतु केंद्र सरकार की अधिकृत संस्था GSI ने मुंबई के 74 अति-संवेदनशील व भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का लगातार दो वर्षों तक स्थलीय निरीक्षण एवं तकनीकी अध्ययन किया था। इसके पश्चात वर्ष 2018 में 435 पन्नों की एक विस्तृत ‘जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट’ (Risk Assessment Report) तैयार कर BMC को सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट में GSI ने मुंबई के संवेदनशील पहाड़ी इलाकों के लिए एक समग्र ‘भूमि उपयोग नीति’ (Land-Use Policy) लागू करने का स्पष्ट निर्देश दिया था।

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