छिंदवाड़ा। छत्तीसगढ़ के जंगलों से 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करने के बाद एक जंगली हाथी छिंदवाड़ा जिले के आसपास सतपुड़ा के जंगलों में लगातार भटक रहा है। हाथी का पीछा करते-करते वन विभाग की भारी-भरकम टीम थक चुकी है, लेकिन हाथी काबू में नहीं आ पा रहा है। हाथी की इस धमाचौकड़ी से ग्रामीणों और खेतों में काम करने वाले किसानों में भारी दहशत का माहौल है। बताया जा रहा है कि यह हाथी अब तक अलग-अलग इलाकों में दो लोगों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर चुका है।
🌲 सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और देलाखारी रेंज में आंखमिचौली: वन विभाग की टीम के लिए बना सिरदर्द
वन विभाग के कर्मचारी हाथी की लोकेशन को ट्रैक कर लगातार उसका पीछा कर रहे हैं, लेकिन उसकी आंखमिचौली वन अमले के लिए बड़ा सिरदर्द बनी हुई है।
यह हाथी वन विभाग की टीम को छकाते हुए कभी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (Satpura Tiger Reserve) की सीमा में चला जाता है, तो कभी छिंदवाड़ा की फॉरेस्ट रेंज में लौट आता है। पिछले एक सप्ताह से तामिया और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बीच हाथी की आवाजाही जारी है। रविवार को यह हाथी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में दाखिल हुआ था, जिससे अधिकारियों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन एक ही दिन बाद वह वापस छिंदवाड़ा के पश्चिम वन मंडल अंतर्गत देलाखारी रेंज में पहुंच गया।
🌽 खेतों में खड़ी मक्के की फसल की चौपट: डर के मारे खेतों में काम नहीं कर पा रहे किसान
हाथी की वापसी के बाद वन विभाग की टीम एक बार फिर पूरी तरह एक्टिव हो गई है और संबंधित क्षेत्र में सघन सर्चिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
हाथी फिलहाल आजनगांव के आसपास खेतों में देखा गया है, जहां उसने खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। आजनगांव निवासी किसान गोपी यादव ने बताया, “खेत में फसल की रखवाली के लिए बनी मचान और मक्के की फसल को हाथी ने रौंदकर तबाह कर दिया है। इलाके में जंगली हाथी के खुलेआम घूमने से जान-माल का खतरा बना हुआ है, जिससे किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं।”
⚡ हादसे से बचाने के लिए काटी गई बिजली: करंट के खतरे को देखते हुए राजस्व व पावर कंपनी अलर्ट
पश्चिम वन मंडल के डीएफओ साहिल गर्ग ने बताया, “हाथी की वर्तमान लोकेशन देलाखारी रेंज में है और वन विभाग की विशेष टीम उसके हर मूवमेंट पर बारीक नजर रखे हुए है। हाथी की सुरक्षा और ग्रामीणों को हादसों से बचाने के लिए वन विभाग के साथ-साथ बिजली कंपनी और राजस्व विभाग की टीम भी लगातार मुस्तैद है।”
सुरक्षा के दृष्टिकोण से हाथी जिस मार्ग या गांव से होकर गुजर रहा है, वहां की बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है। अक्सर हाथी गुस्से में बिजली के खंभों पर हमला कर देते हैं, जिससे पोल गिरने और करंट फैलने का खतरा रहता है। हाथी को सुरक्षित रेस्क्यू करने या खदेड़ने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में योजना बनाई जा रही है और जल्द ही विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई जाएगी।
🐾 भटकने के बाद मूल क्षेत्र में लौटने का प्रयास करते हैं जानवर: वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट का विश्लेषण
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट डॉ. अंकित मेश्राम ने इस संबंध में वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए बताया, “कोई भी जंगली जानवर जब रास्ता भटक कर अपनी मूल जगह से किसी दूसरी अनजान जगह पर चला जाता है, तो वह प्राकृतिक रूप से वापस लौटने की कोशिश करता है। वापसी के लिए वे उसी सीधे रास्ते का उपयोग नहीं करते, बल्कि एक घुमावदार (कर्व) रास्ता बनाते हुए लौटते हैं—चाहे वह बाघ हो या हाथी। इस हाथी के मामले में भी ऐसा ही प्रतीत हो रहा है कि वह छत्तीसगढ़ से भटकते हुए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व तक पहुंच गया है और अब सुरक्षित रास्ता तलाश रहा है।”

